तपस्या करने के लिए शरीर से अधिक मन की ताकत जरूरी, आचार्य पुलकसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में उत्तम तप धर्म की आराधना
भीलवाड़ा। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज संसघ के सानिध्य में शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में दशलक्षण (पर्युषण) महापर्व की आराधना के तहत सातवें दिन मंगलवार को उत्तम तप धर्म का पूजन एवं आराधना की गई।
भगवान का अभिषेक करने एवं भक्ति में श्रावक श्राविकाएं झूम उठे ओर जमकर नाचते गाते रहे। आचार्य पुलकसागर महाराज ने उत्तम तप धर्म का संदेश देते हुए कहा कि जो तपता नहीं वह पकता नहीं है। सोना तपने के बाद निखरता है उसी तरह आत्मा तपने के बाद परमात्मा बनती है। जीवन को निखारना है तो तपना पड़ेगा। महावीर दर्शन न भोग का, न योग का वह तो उपयोग का दर्शन है।
आचार्यश्री ने कहा शरीर ओर भीतर दोनों तरह की तपस्या होती है। मोक्ष का अधिकारी वहीं बनता है जो भीतर से तपता ओर बाहर से भी तपने का प्रयास करता है। तपस्वी की अनुमोदना करने से भी पुण्य मिलता है। दशलक्षण पर्व के दौरान जो दस दिन की उपवास तपस्या कर रहे है उनका अभिनंदन होना चाहिए। तपस्या से काया ओर आत्मा दोनों निर्मल व पावन बनते है। उन्होंने कहा कि तपस्या से जीवन का कल्याण होता है। शरीर व आत्मा दोनों को तपाने पर ही मुक्ति का मार्ग खुलेगा।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि निश्चय ओर व्यवहार दोनों की साधना करने पर आत्मा परमात्मा में बदल जाती है। आत्मा यदि शुद्ध हो जाए तो वह सिद्धालय में विराजमान हो जाती है उसे फिर जन्म नहीं लेना पड़ता है। तपस्या करने के लिए शरीर से अधिक मन की ताकत जरूरी है। मन मजबूत कर लिया तो तपस्या सहजता से हो जाती है ओर मन कमजोर हुआ तो तप मार्ग पर नहीं चल सकते। तप की साधना जीवन को आनंदमय ओर सुखी बनाती है। जो तप का संकल्प करता है वह सफल भी होता है।
उन्होंने कहा कि यहां पर्युषण में धर्म आराधना का जो एतिहासिक माहौल बना है उसके कारण भीलवाड़ा चातुर्मास की चर्चा पूरे देश में हो रही है ओर चातुर्मास समिति की समर्पित भाव से दी जा रही सेवाओं से ऐसा हो पाया है।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि पर्युषण में आयोजित पाप नाशनम् शिविर में शामिल सैकड़ो श्रद्धालु प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक परमात्मा की पूजा अर्चना व भक्ति में समर्पित है। पूर्यषण के सातवें दिन चक्रवती बनकर भगवान का अभिषेक करने का सौभाग्य संतकुमार, विपुल, अतुल पाटनी परिवार ने प्राप्त किया। शांतिधारा का सौभाग्य पारस, खुश्बू जैन इन्दौर ने प्राप्त किया। सांयकालीन महाआरती का सौभाग्य श्री पार्श्वनाथ महिला मण्डल शास्त्रीनगर ने प्राप्त किया।
दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन बुधवार को उत्तम त्याग धर्म की आराधना होगी। चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा के अनुसार पाप नाशनम शिविर एवं पर्युषण की दस दिवसीय आराधना अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर 25 सितम्बर को पूर्ण होगी। इस दौरान प्रतिदिन सुबह 5.30 से 6.30 बजे तक योग ध्यान एवं आचार्य भक्ति हो रही है। सुबह 7 बजे से भगवान का अभिषेक, शांतिधारा व दशलक्षण धर्म पूजन हो रहा है।
सुबह 9.15 से 10.15 बजे तक आचार्य पुलकसागर महाराज के प्रवचन हो रहे है। शाम 4 बजे से धार्मिक कक्षाएं हो रही है। शाम 5.30 से 6.30 बजे तक प्रतिक्रमण एवं ध्यान साधना का आयोजन होता है। शाम को 6.30 बजे आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से परमात्मा की भक्ति हो रही है।
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