जिम्मेदार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों पर भी हो कार्रवाई
मिशनसच न्यूज, अलवर। राजस्थान में करीब 300 सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या शून्य होने के मामले को लेकर पूर्व नि:शक्तजन आयुक्त खिल्लीमल जैन ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मांग की है कि ऐसे स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों का वेतन तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए तथा अब तक दिए गए वेतन की संबंधित शिक्षकों से रिकवरी की जाए।
खिल्लीमल जैन ने कहा कि जब किसी स्कूल में एक भी छात्र नामांकित नहीं है, तो वहां शिक्षकों की नियुक्ति और उन्हें वेतन दिया जाना सरकारी धन की खुली बर्बादी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार एक ओर श्रमिकों के लिए “काम नहीं तो वेतन नहीं” की नीति लागू करती है, तो फिर शून्य छात्र संख्या वाले स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षिकाओं को किस आधार पर वेतन दिया जा रहा है।
उन्होंने मांग की कि ऐसे स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती करने वाले अधिकारियों के साथ-साथ उनकी डिजायर लिखने वाले विधायकों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए। जैन का कहना है कि यह लापरवाही न केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि आम जनता के टैक्स के पैसे की भी बर्बादी है।
पूर्व नि:शक्तजन आयुक्त ने कहा कि यदि इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो राजस्थान सरकार द्वारा दो वर्ष पूरे होने पर मनाई जा रही उपलब्धियां केवल औपचारिकता बनकर रह जाएंगी।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या शून्य है, तो ऐसे में संबंधित अधिकारी किस आधार पर वहां शिक्षकों की नियुक्ति कर देते हैं। यह पूरी व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।
खिल्लीमल जैन ने सरकार से मांग की कि शून्य छात्र संख्या वाले स्कूलों को तत्काल बंद किया जाए और उनके संसाधनों का उपयोग उन स्कूलों में किया जाए, जहां विद्यार्थियों की संख्या पर्याप्त है और सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि इससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा और सरकारी संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क
https://missionsach.com/category/india

