केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने सरिस्का में दी संरक्षण नीति को नई दिशा
मिशनसच न्यूज, अलवर। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव तथा वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने शनिवार को सरिस्का टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आयोजित व्याघ्र रेंज राज्यों के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालकों एवं व्याघ्र आरक्षों के क्षेत्र निदेशकों के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के आउटरीच जनरल-स्ट्रीप्स का विमोचन भी किया।
केंद्रीय मंत्री यादव ने कहा कि भारत में टाइगर रिजर्व्स की बढ़ती संख्या हमारी पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने टाइगर संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं और विश्व के लगभग 70 प्रतिशत बाघ भारत में पाए जाते हैं। उन्होंने एनटीसीए की अब तक हुई बैठकों के सभी नीतिगत निर्णयों की समीक्षा कर एक विस्तृत निष्कर्ष रिपोर्ट तैयार करने का आह्वान किया, जिससे नीति, प्रबंधन और क्रियान्वयन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन में टाइगर संरक्षण, पर्यटन प्रबंधन, मानव-वन्यजीव संघर्ष, रेंजर्स की सामाजिक सुरक्षा, फ्लोरा-फोना संरक्षण, वैज्ञानिक गणना पद्धति, टाइगर रेस्क्यू एवं पुनर्वास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। साथ ही टाइगर रिजर्व क्षेत्रों के लिए जोन आधारित कार्ययोजना बनाकर प्राकृतिक आवास संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा दिया जाए।
चीता पुनर्वास कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने विलुप्त प्रजाति के सफल अंतरराष्ट्रीय स्थानांतरण का उदाहरण प्रस्तुत किया है और अब तीसरी पीढ़ी तक चीतों का विस्तार हो चुका है। फरवरी के अंत तक बोत्सवाना से चीतों का नया जत्था आने की संभावना है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (आईबीसीए) में 24 देश शामिल हो चुके हैं और भारत में पहला वैश्विक बिग कैट शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल जैव विविधता संरक्षण, मरुस्थलीकरण और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सहायक सिद्ध होगी।
वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने कहा कि अरावली की तलहटी में बसे अलवर में इस तरह का अंतरराष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन और टाइगर मैराथन आयोजित होना जिले के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने बताया कि प्रभावी मॉनिटरिंग के कारण सरिस्का में बाघों की संख्या 50 तक पहुंच चुकी है। साथ ही जीन पूल सुदृढ़ करने के लिए बाघिनों के ट्रांसलोकेशन की अनुमति मिलने से भविष्य में बाघों की संख्या और बढ़ेगी।
सम्मेलन के साथ राष्ट्रीय प्राकृतिक संग्रहालय द्वारा आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। वरिष्ठ एवं कनिष्ठ वर्ग के प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं नकद पुरस्कार प्रदान किए गए।
इस अवसर पर केंद्रीय एवं राज्य वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, एनटीसीए के प्रतिनिधि, फील्ड डायरेक्टर्स, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन्स तथा बड़ी संख्या में विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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