सृजक की मासिक कवि गोष्ठी में डॉ. जीवन सिंह मानवी थे मुख्य वक्ता
मिशनसच न्यूज, अलवर, । “सच्चा साहित्य आत्मबद्धता से मुक्त करता है। सृजन तभी संभव है जब लेखक या कवि स्वयं को बंधनों से आज़ाद करे। आज कविता के केंद्र में मनुष्य है, और एक सच्चा कवि सत्य का अन्वेषण करता है।” — यह विचार वरिष्ठ समीक्षक डॉ. जीवन सिंह मानवी ने सृजक संस्था की मासिक कवि गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।
कार्यक्रम का आयोजन रेलवे स्टेशन के सामने संजय कॉलोनी स्थित एम.एन.सी.आई. सभागार में किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि रघुवर दयाल जैन ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. देवेन्द्र शर्मा और जगदीश भारद्वाज मौजूद रहे।
कविताओं में श्रमिकों की पीड़ा और देशभक्ति का स्वर
जगदीश भारद्वाज ने गीतों में श्रमिकों की पीड़ा को स्वर दिया।
गिरवर सिंह बाँकावत ने देश के वीर बलिदानियों को याद किया।
उर्दू शायर सरदार अमरीक सिंह ‘अदब’ ने अपनी ग़ज़लों से महफ़िल में रंग भर दिया।
वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल राम शर्मा ‘दिवाकर’ ने ‘दीपक-गीत’ सुनाकर श्रोताओं में आशा का संचार किया।
सरस्वती वंदना से हुआ आगाज़
गोष्ठी की शुरुआत सरस्वती प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई। गोकुल राम शर्मा ‘दिवाकर’ ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अध्यक्ष रघुवर दयाल जैन के मेवाती गीत “ढूमलो” ने श्रोताओं को तालियों पर मजबूर कर दिया।
विविध विषयों पर कविताएं
प्रेम प्रकाश शर्मा, रामचरण ‘राग’ और सीमा कालरा ने रक्षाबंधन पर रचनाएं प्रस्तुत कीं।
रघुनंदन अवस्थी ने तिरंगा गीत सुनाया।
युवा कवि महेश वेदामृत की रचना “अभी देश स्वतंत्र कहाँ है” ने सोचने पर मजबूर किया।
युवा कवयित्री सुजाता नेगी ने “ऑपरेशन सिंदूर” पर केंद्रित कविता से जोश भर दिया।
रवीन्द्र मिश्र ने गणेश वंदना पेश की।
मुंबई से आए वरिष्ठ कवि राजेन्द्र शर्मा की कविताओं को खूब सराहना मिली।
सदा राम ‘सदा’ और डॉ. वेद प्रकाश यादव की समसामयिक रचनाओं ने गंभीर माहौल बनाया।
शिक्षाविद रेणु मिश्रा ने ‘मन रे तू काहे न धीर धरे’ गीत से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति
कार्यक्रम में सृजक संस्थान के संरक्षक भरत सिंह अहरोदिया, उपाध्यक्ष खेमेन्द्र सिंह चंद्रावत, कोषाध्यक्ष हेमराज सैनी, वरिष्ठ समाजसेवी बी.डी. गुप्ता, भवानी शंकर शर्मा, जितेन्द्र पोपली, राधेश्याम शर्मा, प्रदीप सैनी, राज नारायण सैन सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन संस्था के सचिव रामचरण ‘राग’ ने किया।