देश-विदेश से आए संतों ने सनातन धर्म, विश्व शांति और मानव कल्याण का दिया संदेश; अंतिम दिन भंडारे में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
भरतपुर। श्री लटूरियां हनुमान भक्त मंडल एवं तपस्वी बाबा रामशरण दास महाराज के शिष्यों की ओर से सिद्ध श्री लटूरियां हनुमान मंदिर पर 113 वर्षीय तपस्वी बाबा रामशरण दास महाराज की 29वीं पुण्यतिथि तथा श्रीराम मंदिर निर्माण के उपलक्ष्य में आयोजित रामकथा और संत समागम का भव्य समापन हुआ। यह आयोजन महंत भानुदास महाराज और संत मणिराम दास महाराज के सान्निध्य में संपन्न हुआ। समापन अवसर पर श्रीराम यज्ञ, संत दर्शन और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में हिमालय निवासी महामंडलेश्वर अभिराम दास महाराज, अयोध्या के महंत देवेन्द्र प्रसादाचार्य महाराज, महंत बिन्दुगाद्याचार्य महाराज, जगद्गुरु रामानंदाचार्य सेवापीठ नेपाल के स्वामी रामकृष्णाचार्य महायोगी तथा जानकी घाट अयोध्या के रसिक पीठाधीश्वर महंत जनमेजय शरण रामदास महाराज सहित कई संत-महात्माओं ने भाग लिया। संतों ने अपने प्रवचनों में संत सेवा, विश्व शांति, मानव कल्याण और सनातन धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला।
जगद्गुरु स्वामी अभिराम दास महाराज ने कहा कि प्रभु की कृपा से ही मानव जीवन सफल होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान के नाम का नित्य जाप करने तथा रामचरितमानस की चौपाइयों और सुंदरकांड का नियमित पाठ करने की प्रेरणा दी।
नेपाल के जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामकृष्णाचार्य महायोगी ने कहा कि सनातन धर्म ही मानव जीवन की सुरक्षा और विश्व में शांति बनाए रखने का आधार है। जहां सनातन धर्म की पालना नहीं होती, वहां अशांति और अस्थिरता का वातावरण बन जाता है।
अयोध्या के महंत बिन्दुगाद्याचार्य महाराज ने कहा कि वर्तमान युग में जीवन के कष्टों से मुक्ति पाने के लिए भगवान श्रीराम का पूजन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने संत सेवा और गौसेवा को भी जीवन में महत्वपूर्ण बताते हुए प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया।
अयोध्या के रसिक पीठाधीश्वर महंत जनमेजय शरण महाराज ने कहा कि संतों के दर्शन और सेवा करना अत्यंत सौभाग्य की बात है। जो व्यक्ति संत सेवा करता है, वह वास्तव में प्रभु की सेवा करता है।
लटूरियां हनुमान मंदिर के महंत भानुदास महाराज ने बताया कि तपस्वी बाबा रामशरण दास महाराज की पुण्यतिथि और श्रीराम मंदिर निर्माण के उपलक्ष्य में 26 फरवरी से 7 मार्च तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के तहत संत दर्शन, रामकथा, रामलीला, रासलीला और संत सम्मेलन का आयोजन किया गया।
उन्होंने बताया कि अयोध्या, नेपाल, वृंदावन, चित्रकूट, नर्मदा, पुष्कर, बनारस, प्रयागराज, बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात, दिल्ली और झारखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में संत-महात्मा इस आयोजन में शामिल हुए।
भंडारे में 60 हलवाइयों ने तैयार की 500 मन प्रसादी
लटूरियां हनुमान मंदिर के सेवक सीताराम गुप्ता और पार्षद महेश चंद ने बताया कि 26 फरवरी से 7 मार्च तक लाखों की संख्या में संत और श्रद्धालु श्री लटूरियां हनुमान के दर्शन करने पहुंचे। कार्यक्रम के अंतिम दिन संत दर्शन और भंडारे में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा।
भंडारे की प्रसादी तैयार करने के लिए अमर सिंह हलवाई की टीम के 60 सदस्यों ने सेवाएं दीं। इस विशाल भंडारे में 50 मन सब्जी, 20 कट्टे चीनी, 400 किलोग्राम चावल, 80 किलोग्राम मेवा, 800 किलोग्राम गुड़, 10 पीपे सरसों तेल, 25 पीपे रिफाइंड, 12 डिब्बे देशी घी और सवा लाख रुपये से अधिक के मसालों का उपयोग किया गया।
हलवाई अमर सिंह ने बताया कि एक मन आटे से तैयार की गई प्रसादी से लगभग 500 लोगों का भोजन हो जाता है। इस तरह हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण कर धार्मिक आयोजन में भाग लिया।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


