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    सीताराम गुप्ता को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड, 25 दिसंबर को जयपुर में सम्मान

    ग्रामीण विकास व समाज सेवा में दशकों के योगदान के लिए एमएनआईटी के पूर्व छात्र सीताराम गुप्ता को 25 दिसंबर को जयपुर में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड मिलेगा।

    मिशनसच न्यूज | भरतपुर।
    ग्रामीण विकास, समाज सेवा और स्वरोजगार के क्षेत्र में दशकों से उल्लेखनीय व प्रेरणादायी योगदान देने वाले मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज (एमएनआईटी) के पूर्व छात्र सीताराम गुप्ता को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। यह प्रतिष्ठित सम्मान 25 दिसंबर 2025 को मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमएनआईटी), जयपुर द्वारा आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान उनके उस जीवनपर्यंत समर्पण का प्रतीक है, जिसके माध्यम से उन्होंने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    सीताराम गुप्ता ने मालवीय रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज (वर्तमान एमएनआईटी) से बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने विद्युत विभाग में सहायक अभियंता के रूप में सरकारी सेवा की शुरुआत की। हालांकि, समाज के वंचित और ग्रामीण तबके के लिए कुछ अलग और बड़ा करने की भावना ने उन्हें वर्ष 1989 में सरकारी सेवा छोड़ने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने ग्रामीण एवं समग्र विकास के क्षेत्र में कार्यरत संस्था से जुड़कर निदेशक के रूप में जिम्मेदारी संभाली और पूरी ऊर्जा के साथ सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कार्य प्रारंभ किया।

    उनके नेतृत्व में कृषि, पशुपालन, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं तथा ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में अनेक नवाचारी और प्रभावशाली योजनाएँ लागू की गईं। विशेष रूप से भरतपुर क्षेत्र में उन्होंने स्वरोजगार आधारित कार्यक्रमों को नई दिशा दी। मधुमक्खी पालन, मछलीपालन, तुलसी माला निर्माण जैसे कार्यों को उन्होंने केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें स्थायी आजीविका के साधन के रूप में विकसित किया। इन पहलों से हजारों युवक-युवतियों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला।

    सीताराम गुप्ता के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि भरतपुर में देश की सबसे बड़ी शहद प्रसंस्करण इकाई की स्थापना संभव हो सकी। इस उपलब्धि ने न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाए, बल्कि मधुमक्खी पालन को एक संगठित उद्योग का रूप दिया। वर्तमान में यह व्यवसाय भरतपुर तक सीमित न रहकर राजस्थान के सरसों उत्पादक जिलों, साथ ही मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों तक फैल चुका है।

    आज इस शहद उद्योग से लगभग 8,000 युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हो रहा है। वहीं, करीब 9 हजार मीट्रिक टन शहद का निर्यात विभिन्न देशों में किया जा रहा है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के कारण भरतपुर की पहचान अब केवल केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान तक सीमित न रहकर, देशभर में “हनी सिटी” के रूप में स्थापित हो चुकी है। यह पहचान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

    वर्तमान में सीताराम गुप्ता समृद्ध भारत अभियान के निदेशक पद पर कार्यरत हैं और निरंतर ग्रामीण भारत के उत्थान के लिए योजनाबद्ध ढंग से कार्य कर रहे हैं। उनके सामाजिक योगदान को देखते हुए उन्हें इससे पूर्व भी अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है। इनमें फिक्की अवार्ड, महेन्द्रा समृद्धि अवार्ड, इंडिया एग्रीकल्चर अवार्ड, सीआईआई नेशनल अवार्ड, नाबार्ड एक्सीलेंस अवार्ड, महात्मा सीएसआर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड, भामाशाह अवार्ड, यूनेस्को चेतना अवार्ड, जी न्यूज अवार्ड, टाइम्स मैन ऑफ द ईयर अवार्ड, इकोनॉमिक टाइम्स लीडर अवार्ड और इंस्पायरिंग लीडर अवार्ड प्रमुख रूप से शामिल हैं।

    एमएनआईटी जयपुर द्वारा दिया जाने वाला यह लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड उनके उस संघर्ष, दृष्टि और सेवा भावना को सम्मानित करता है, जिसने ग्रामीण भारत में आत्मनिर्भरता और रोजगार की नई संभावनाएँ पैदा की हैं। सीताराम गुप्ता का जीवन आज उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो समाज सेवा को केवल विचार नहीं बल्कि कर्म के रूप में जीना चाहते हैं।

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