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    हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटेंगे 41 शिवभक्त, रूंध सीरावास में होगा भव्य जलाभिषेक

    सावन में गूंजेगा हर-हर महादेव का जयघोष, 11 अगस्त को जलाभिषेक में उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब

    रूंध सीरावास। श्रावण मास की पावन बेला में भगवान शिव के प्रति आस्था और भक्ति का अनूठा उदाहरण देखने को मिलेगा। रूंध सीरावास क्षेत्र के 41 कांवड़िए हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लौट रहे हैं। सभी शिवभक्त 11 अगस्त को स्थानीय प्राचीन शिव मंदिर में विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान भोलेनाथ का सामूहिक जलाभिषेक करेंगे।

    यह धार्मिक आयोजन केवल एक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धा, संयम, सेवा और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रतीक है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर कठिन कांवड़ यात्रा पूरी कर लौट रहे शिवभक्तों के स्वागत की तैयारियां भी ग्रामवासियों की ओर से की जा रही हैं।

    हर-हर महादेव के जयघोष से मंदिर में करेंगे प्रवेश

    आयोजन समिति के अनुसार 11 अगस्त की प्रातःकालीन बेला में कांवड़ यात्रा पूरी करने के बाद सभी शिवभक्त हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष के साथ मंदिर परिसर में प्रवेश करेंगे। इसके बाद पवित्र गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा।

    धार्मिक विधि-विधान के अनुसार जलाभिषेक के साथ दुग्धाभिषेक और पूजन-अर्चन भी संपन्न कराया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होने वाले इस आयोजन से मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा।

    भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण की विशेष व्यवस्था

    धार्मिक आयोजन को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक रूप से सजाया जा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और प्रसाद वितरण की विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

    आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय श्रद्धालुओं और युवाओं की भी सक्रिय सहभागिता रहेगी। ग्रामवासियों की ओर से हरिद्वार से लौटने वाले कांवड़ियों का हर्षोल्लास और श्रद्धाभाव के साथ स्वागत किया जाएगा।

    श्रद्धा के साथ सामाजिक समरसता का संदेश

    आयोजन समिति ने बताया कि कांवड़ यात्रा और सामूहिक जलाभिषेक का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देना भी है। कांवड़िए हरिद्वार से गंगाजल लाकर भगवान शिव को अर्पित करेंगे और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

    समिति ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से 11 अगस्त को मंदिर परिसर में पहुंचकर इस पावन आयोजन में शामिल होने और धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की है।

    आयोजन समिति के अनुसार यह आयोजन सनातन धार्मिक परंपराओं, सामाजिक समरसता और भारतीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल है।

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