श्रीनगर में पहलगाम हमले की जांच के बीच हाफिज सईद पर शिकंजा, पूरक आरोपपत्र के बाद अदालत ने जारी किया वारंट
श्रीनगर: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने पहलगाम आतंकी हमले के मामले में एक बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने पाकिस्तान में छिपे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के सरगना हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है।
यह महत्वपूर्ण आदेश एनआईए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश द्वारा 8 जुलाई को पारित किया गया। इससे महज दो दिन पहले ही केंद्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की तफ्तीश के सिलसिले में हाफिज सईद के खिलाफ एक पूरक चार्जशीट (आरोपपत्र) दाखिल की थी।
76 वर्षीय हाफिज सईद को भारत और अमेरिका दोनों ही देश वैश्विक आतंकवादी घोषित कर चुके हैं। उसे साल 2008 में हुए मुंबई के 26/11 आतंकी हमलों का मुख्य साजिशकर्ता और मास्टरमाइंड भी माना जाता है।
जम्मू स्थित विशेष एनआईए अदालत में पेश किए गए इस पूरक आरोपपत्र में हाफिज सईद पर निजी तौर पर और लश्कर-ए-तैयबा के साथ-साथ घाटी में सक्रिय उसके मुखौटा संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) के प्रमुख के रूप में गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
- आरोपी के खिलाफ देश के नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।
- इसके साथ ही, देश विरोधी गतिविधियों को लेकर सख्त गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 की विभिन्न धाराओं के तहत भी शिकंजा कसा गया है।
अदालती आदेश के अनुसार, एनआईए ने विशेष कोर्ट को अवगत कराया कि मूल रूप से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा का रहने वाला फरार आतंकी हाफिज सईद पहलगाम हमले की साजिश में सीधे तौर पर नामजद है। वह कानून की पकड़ से बचने के लिए जानबूझकर छिपा हुआ है।
जांच एजेंसी ने अदालत से मांग की थी कि सईद के खिलाफ एक खुली तारीख (ओपन-एंडेड) वाला गैर-जमानती वारंट जारी किया जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके खिलाफ आगे की कानूनी और कूटनीतिक कार्रवाई शुरू की जा सके।
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