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    पहचान बदलते ही खाते से गायब हुए ₹40,999, साइबर अपराधियों का नया तरीका

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के अंतर्गत आने वाले बरगी थाना क्षेत्र से ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी और वित्तीय धोखाधड़ी (साइबर क्राइम) का एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहाँ के ग्राम तिनसी में रहने वाले एक 22 वर्षीय ग्रामीण युवक नितिन पटेल डिजिटल जालसाजों के बिछाए शातिर जाल में फंस गए। अज्ञात साइबर ठग ने युवक को अपनी बातों के मायाजाल में फंसाकर उसके बैंक खाते तक अवैध रूप से पहुंच (एक्सेस) बना ली और पलक झपकते ही खाते में जमा गाढ़ी कमाई साफ कर दी।

    खाते से अचानक कटे 40,999 रुपये, पीड़ित ने बरगी थाने में दर्ज कराया मुकदमा

    पीड़ित नितिन पटेल ने इस पूरी घटना को लेकर पुलिस को लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के मुताबिक, यह वारदात हाल ही में घटित हुई, जिसके बाद पीड़ित ने तुरंत थाने पहुंचकर आपबीती सुनाई। नितिन ने बताया कि एक अज्ञात कॉलर ने खुद को कोई अन्य व्यक्ति या अधिकारी बताकर उनसे मोबाइल पर संपर्क किया था। फोन पर ठग ने इतनी चतुराई और पेशेवर अंदाज में बात की कि नितिन उसकी नीयत को भांप नहीं पाए और जालसाज के कहे अनुसार कदम उठाते चले गए।

    बातों-बातों में ठग ने नितिन के बैंक खाते और डिजिटल वॉलेट से जुड़ी बेहद संवेदनशील और गोपनीय वित्तीय जानकारियां छलपूर्वक हासिल कर लीं। इसके कुछ ही पलों के भीतर नितिन के मोबाइल पर बैंक से पैसे कटने का मैसेज आया, जिसे देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। शातिर ठग ने उनके खाते से कुल 40 हजार 999 रुपये उड़ा लिए थे। खाते से इतनी बड़ी रकम अचानक गायब होने के बाद युवक को खुद के साथ हुई इस बड़ी धोखाधड़ी का अहसास हुआ। बरगी थाना पुलिस ने पीड़ित की शिकायत को बेहद गंभीरता से लेते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) [छल करना] और 319(2) [पहचान छुपाकर धोखाधड़ी करना] के तहत आपराधिक मामला पंजीकृत कर लिया है और आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

    डिजिटल जालसाज ने कैसे खाली किया बैंक खाता? साइबर एक्सपर्ट्स ने खोला राज

    पुलिस की प्राथमिक और तकनीकी जांच में यह बात साफ हो गई है कि इस वारदात के पीछे किसी बेहद शातिर अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का हाथ हो सकता है। ठग ने अपनी असली पहचान को पूरी तरह छुपाकर पीड़ित युवक को विश्वास में लेने के लिए किसी बेहद लुभावनी सरकारी योजना, लॉटरी का लालच या फिर बैंक खाता ब्लॉक होने जैसे किसी कल्पित डर का झांसा दिया था। नितिन जैसे ही घबराहट या लालच में आकर आरोपी की बातों में आए, आरोपी ने उनसे एक गुप्त कोड या क्रेडेंशियल्स हासिल कर लिए।साइबर विशेषज्ञों (साइबर सेल) का अनुमान है कि आरोपी ने युवक के मोबाइल पर कोई संदिग्ध लिंक भेजा था या फिर उसे बातों में उलझाकर कोई 'रिमोट एक्सेस ऐप' (जैसे एनीडेस्क या टीमव्यूअर) डाउनलोड करवा लिया था। इस ऐप के माध्यम से ठग ने दूर बैठे ही युवक के पूरे मोबाइल स्क्रीन और बैंकिंग ऐप को अपने नियंत्रण में ले लिया और कुछ ही सेकंड्स के भीतर 40,999 रुपये अपने फर्जी खातों में ट्रांसफर कर लिए।

    संदिग्ध मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की पड़ताल में जुटी पुलिस, ग्रामीणों में दहशत

    बरगी थाना पुलिस इस मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए तकनीकी साक्ष्य और डिजिटल फुटप्रिंट्स जुटाने में पूरी ताकत से लग गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिस मोबाइल नंबर से पीड़ित को फोन आया था और जिन बैंक खातों या डिजिटल वॉलेट्स में यह अवैध ट्रांजेक्शन (पैसा ट्रांसफर) किया गया है, उनकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और बैंक स्टेटमेंट खंगाले जा रहे हैं।इस पूरी जांच प्रक्रिया में जबलपुर साइबर सेल की विशेष टीम की भी मदद ली जा रही है ताकि संदिग्ध अपराधियों के सटीक लोकेशन और पहचान को ट्रेस किया जा सके। इधर, ग्रामीण अंचल के एक सीधे-साधे युवक के साथ हुई इस हाई-टेक ठगी की घटना के बाद से ग्राम तिनसी और आसपास के पूरे इलाके में दहशत और चिंता का माहौल है। इस घटना के बाद स्थानीय ग्रामीण अपनी ऑनलाइन सुरक्षा और बैंक खातों में जमा पूंजी को लेकर काफी चिंतित नजर आ रहे हैं। पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात व्यक्ति को अपना ओटीपी, पिन या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें।

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