More
    Homeराजनीति71 लाख कैश और 15 करोड़ का ट्रांजैक्शन! अभिषेक बनर्जी के PA...

    71 लाख कैश और 15 करोड़ का ट्रांजैक्शन! अभिषेक बनर्जी के PA पर क्यों बढ़ा जांच का दबाव?

    नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल सरकार ने देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के समक्ष मजबूत पक्ष रखते हुए तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव सुमित रॉय को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की मांग की है। यह पूरा मामला सालबोनी में कथित तौर पर जमीन हड़पने से संबंधित है। राज्य सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को अवगत कराया कि सुमित रॉय जांच के दौरान महत्वपूर्ण प्रश्नों का उत्तर देने से बचते रहे हैं। राज्य सरकार ने अपनी दलीलों के समर्थन में पूछताछ के दौरान तैयार की गई लिप्यंतरण (ट्रांसक्रिप्ट) भी पीठ के समक्ष प्रस्तुत की। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की संयुक्त पीठ द्वारा की जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार, रॉय के बैंक खाते में विशाल धनराशि नकद रूप से जमा की गई है और अब तक करीब 15 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन की बात सामने आई है।

    सुमित रॉय के बैंक खातों में भारी नकद जमा का बड़ा दावा

    न्यायालय में दलीलें पेश करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रेखांकित किया कि जांच के दौरान सुमित रॉय के वित्तीय खातों में असाधारण रूप से भारी नकद राशि जमा होने के साक्ष्य मिले हैं। उन्होंने विशेष रूप से 71 लाख रुपये की सीधी नकद जमा राशि का ब्यौरा देते हुए कहा कि यह तो इस विस्तृत वित्तीय हेरफेर की महज एक बानगी भर हो सकती है। सॉलिसिटर जनरल के अनुसार, अब तक की पड़ताल में कुल नकद लेन-देन का आंकड़ा 15 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच रहा है, जिसमें अनेक वित्तीय प्रविष्टियां शामिल हैं।

    राज्य सरकार द्वारा कस्टोडियल पूछताछ की आवश्यकता पर जोर

    राज्य प्रशासन का स्पष्ट तर्क है कि बैंक खातों के इन बड़े वित्तीय लेन-देन के रहस्यों का पर्दाफाश करने के लिए सुमित रॉय को हिरासत में लेकर आमने-सामने पूछताछ करना नितांत आवश्यक है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि एक व्यक्तिगत सहायक (पीए) के पद पर कार्यरत व्यक्ति के खाते से करोड़ों रुपये का लेन-देन होना एक गंभीर विषय है और यह पूरी अनियमितता का एक छोटा सा हिस्सा हो सकता है। सरकार का मानना है कि हिरासत में लेकर की जाने वाली पूछताछ से ही इन पैसों के स्रोत और सालबोनी जमीन विवाद के बीच के अंतर्संबंध उजागर हो सकेंगे।

    बचाव पक्ष की ओर से दी गई दलीलें और आरोप

    दूसरी तरफ, सुमित रॉय का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने अदालत को बताया कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस मामले में पहले ही आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया जा चुका है। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने स्पष्ट किया कि वह चार्जशीट किसी अन्य आरोपी के संदर्भ में है और रॉय के खिलाफ जांच अभी जारी है। बचाव पक्ष के वकील ने यह भी तर्क दिया कि पूछताछ प्रक्रिया की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध है और उनके मुवक्किल ने सभी प्रश्नों का सहयोगपूर्वक उत्तर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांचकर्ता मूल मामले की जांच करने के बजाय रॉय के परिवार, तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक कामकाज, भर्तियों और पार्टी फंडिंग से संबंधित सवाल पूछने में अधिक रुचि ले रहे थे।

    मामले की आगामी कानूनी प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट का रुख

    सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह अदालत में सौंपी गई सीलबंद जांच रिपोर्ट की एक प्रति सुमित रॉय के कानूनी प्रतिनिधियों को प्रदान करे। इस याचिका पर अगली सुनवाई गुरुवार को निर्धारित की गई है। इससे पूर्व, 31 अगस्त को शीर्ष अदालत ने जांच एजेंसी को बैंक लेन-देन से संबंधित पूछताछ के रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का आदेश दिया था, जिसके बाद 7 सितंबर को राज्य को विस्तृत प्रगति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जमा करने की अनुमति मिली थी। गौरतलब है कि 6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने रॉय को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी, जबकि उससे पहले 3 अगस्त को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। यह पूरा मामला धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश रचने जैसी गंभीर धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here