शिक्षा व्यवस्था पर जूली बोले- जर्जर स्कूल हादसों को दे रहे न्योता; सर्वदलीय बैठक बुलाकर मांगे जाएं सुझाव
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार की ओर से स्कूलों में 12 हजार करोड़ रुपए से अधिक के काम करवाने के दावे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सरकार के तीन साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है, अब बचे हुए समय में यह राशि कब और कैसे खर्च की जाएगी।
जूली ने कहा कि सरकार ने स्कूलों के लिए 12 हजार करोड़ रुपए से अधिक के काम करवाने की बात कही है, लेकिन सवाल यह है कि ये काम अब तक क्यों नहीं करवाए गए। उन्होंने सरकार से पूछा कि यह पैसा कहां है, किस योजना के तहत है और इसे खर्च करने का रोडमैप क्या है। उन्होंने कहा कि केवल आंकड़े और घोषणाएं करने से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होगा।
12 हजार करोड़ के दावे पर मांगा रोडमैप
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है और अब केवल करीब दो साल का समय बचा है। ऐसे में सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि स्कूलों के लिए घोषित 12 हजार करोड़ रुपए कब और किस तरह खर्च किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह राशि किस योजना की है और इसके तहत कितने स्कूलों का निर्माण, कितने भवनों का पुनर्निर्माण और कितने क्लासरूम तैयार किए जाएंगे।
जूली ने कहा कि जनता को केवल खोखले दावों से गुमराह नहीं किया जा सकता। सरकार को घोषणाओं के बजाय धरातल पर काम करके दिखाना चाहिए।
जर्जर स्कूलों को लेकर सरकार पर निशाना
जूली ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों की जर्जर स्थिति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में स्कूल भवन और क्लासरूम खराब स्थिति में हैं। उन्होंने हाल ही में डूंगरपुर में स्कूल की इमारत गिरने की घटना का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं।
उन्होंने दावा किया कि सरकार ने स्वयं 3,768 से अधिक स्कूलों को जर्जर घोषित कर रखा है और 85 हजार से अधिक क्लासरूम खराब स्थिति में हैं। ऐसे में सरकार से सवाल है कि अब तक कितने जर्जर स्कूलों का पुनर्निर्माण किया गया और कितने क्लासरूम दुरुस्त किए गए।
जूली ने कहा कि सरकार को किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय जर्जर भवनों और असुरक्षित क्लासरूम को प्राथमिकता के आधार पर ठीक करना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
शिक्षा व्यवस्था पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर केवल सरकार के स्तर पर फैसले लेने के बजाय सभी राजनीतिक दलों, शिक्षाविदों, आम जनता और मीडिया से भी सुझाव लिए जाने चाहिए।
जूली ने कहा कि राज्य सरकार को खुले तौर पर सुझाव आमंत्रित कर यह तय करना चाहिए कि राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था में किन क्षेत्रों में बदलाव और सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी और समावेशी प्रक्रिया के जरिए ही शिक्षा तंत्र को मजबूत बनाया जा सकता है।
बुनियादी सुविधाओं की कमी पर भी उठाए सवाल
जूली ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त कक्ष, सुरक्षित भवन, ब्लैकबोर्ड और शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हैं, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि सरकार को बंद कमरों में योजनाएं बनाने के बजाय स्कूलों की वास्तविक स्थिति देखकर धरातल पर काम करना चाहिए।
सच दिखाने वालों को डराने का लगाया आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर गंभीर मुद्दों को उठाने वाले पत्रकारों, स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों को कथित तौर पर डराने-धमकाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि स्कूलों की बदहाली की तस्वीर सामने लाने वालों को सुधार करने के बजाय चुप कराने का प्रयास लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।
जूली ने कहा कि जनता के सवाल उठाने और सरकार से जवाब मांगने के अधिकार का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था के संपूर्ण पुनर्गठन के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की।
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