खैरथल में गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने गुरुओं का पूजन कर आशीर्वाद लिया। मंदिरों में हरियाली बढ़ाने व नशे से दूर रहने का संकल्प भी लिया गया।
खैरथल। शहर में गुरुवार को गुरु पूर्णिमा महोत्सव धार्मिक भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने अपने-अपने गुरुओं का पूजन कर आशीर्वाद लिया और गुरु दक्षिणा के रूप में हरियाली बढ़ाने और नशे से दूर रहने का संकल्प लिया।
प्रेमप्रकाश आश्रम बना आकर्षण का केंद्र
शहर के हरसौली रोड स्थित प्रेमप्रकाश आश्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और शिष्य पहुंचे। यहां भगवान लक्ष्मी नारायण और महान संतों — स्वामी टेऊंराम महाराज, स्वामी शांतिप्रकाश महाराज, स्वामी हरिदासराम महाराज, स्वामी जीवनमुक्त महाराज, स्वामी योगिराज महाराज, स्वामी जयमुक्त महाराज, स्वामी भगतप्रकाश महाराज की प्रतिमाओं के समक्ष श्रीफल और मिष्ठान अर्पित कर चरण वंदना की गई।
संत हरि प्रेमप्रकाशी और संत उमेश प्रेमप्रकाशी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गुरु पूर्णिमा का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि गुरु ही जीवन में अंधकार रूपी अज्ञान को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है। गुरु के बिना आत्मज्ञान और सच्चे मार्ग की प्राप्ति संभव नहीं है।
हरियाली और नशा मुक्ति का लिया संकल्प
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रेमप्रकाश आश्रम में एक विशेष संकल्प समारोह भी हुआ। श्रद्धालुओं ने गुरु दक्षिणा के रूप में हरियाली बढ़ाने और जीवनभर नशे से दूर रहने का संकल्प लिया। संत उमेश प्रेमप्रकाशी ने कहा कि जिस प्रकार एक वृक्ष जीवन भर दूसरों को छाया, फल और प्राणवायु प्रदान करता है, उसी तरह हर व्यक्ति को अपने जीवन में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण का प्रण लेना चाहिए।
साथ ही, समाज में बढ़ रही नशाखोरी जैसी सामाजिक बुराई से दूर रहने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की गई।
शहरभर के आश्रमों और मंदिरों में रहे आयोजन
गुरु पूर्णिमा के मौके पर खैरथल शहर के आनंद नगर कॉलोनी स्थित स्वामी ध्यानगिरी महाराज आश्रम, इस्माइलपुर स्थित दरबार साहिब, वल्लभग्राम स्थित स्वामी लीलाशाह आश्रम, और पुरानी अनाज मंडी स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में भी विशेष कार्यक्रम हुए।
हर स्थान पर श्रद्धालुओं ने अपने गुरुओं की पूजा-अर्चना कर चरण वंदना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिरों में विशेष पूजा अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और प्रवचन आयोजित हुए।
शिष्यों ने किया गुरु पूजन
शिष्यों ने अपने गुरुओं के चरणों में फूल, श्रीफल, वस्त्र और मिष्ठान अर्पित कर आशीर्वाद लिया। कई स्थानों पर शिष्य-गुरु सम्मान समारोह भी आयोजित हुए, जहां वरिष्ठ संतों और गुरुओं को शॉल, मालाएं और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
धार्मिक अनुष्ठान और सामूहिक भंडारा
प्रेमप्रकाश आश्रम सहित अन्य आश्रमों और मंदिरों में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सामूहिक भंडारे का आयोजन भी किया गया। श्रद्धालुओं और आमजन ने प्रसाद ग्रहण किया और भजन-कीर्तन में हिस्सा लिया।
पर्यावरण जागरूकता का संदेश
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के माध्यम से संतों ने समाज को पर्यावरण संरक्षण और नशा मुक्ति का संदेश दिया। प्रेमप्रकाश आश्रम में श्रद्धालुओं ने परिसर में पौधरोपण कर हरियाली बढ़ाने की शुरुआत भी की। संत हरि प्रेमप्रकाशी ने कहा कि समाज के हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करे।
नशा मुक्ति का संकल्प भी अनिवार्य
इस अवसर पर युवाओं को नशे से दूर रहने और खेल, शिक्षा व सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया गया। संत उमेश प्रेमप्रकाशी ने कहा कि नशा सिर्फ शरीर ही नहीं, समाज को भी खोखला कर देता है। हर घर, हर मोहल्ले में नशा मुक्ति का अभियान चलाना चाहिए।
खैरथल में गुरु पूर्णिमा महोत्सव 2025 श्रद्धा, भक्ति, सामाजिक जागरूकता और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हर्षोल्लास से संपन्न हुआ। इस महोत्सव ने न केवल धर्म और आस्था को मजबूत किया बल्कि पर्यावरण संरक्षण और नशा मुक्ति जैसे सामाजिक सरोकारों को भी जनमानस तक पहुँचाने का सराहनीय कार्य किया।
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