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    अब AI के भरोसे PDS सिस्टम, राशन दुकानों में नहीं चलेगा कोई घपला

    भोपाल: मध्य प्रदेश में गरीबों को बांटे जाने वाले अनाज के एक-एक दाने का हिसाब रखने के लिए विभाग ने एक नया प्लान तैयार किया है. इससे जहां अनाज वितरण में गड़बड़ी रुकेगी, वहीं विभाग के पास यह रिकॉर्ड भी तैयार होगा कि दुकानों से कितना अनाज सही तरीके से बांटा गया.

    इसके लिए विभाग अब प्रदेश की सभी राशन दुकानों की तुलाई मशीनों को ई-पॉश मशीनों से जोड़ रहा है. इससे उपभोक्ता को कितना राशन दिया गया, इसकी जानकारी विभाग तक सीधे पहुंचेगी. वहीं उंगलियां और अंगूठा स्कैन न होने से राशन न मिलने की समस्या को दूर करने के लिए भी विभाग ने नया रास्ता निकाल लिया है. अब ऐसे उपभोक्ताओं को बिना राशन के नहीं लौटना होगा.

    'ई-पॉश मशीन से जुड़ेंगे तराजू'

    खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के कमिश्नर कर्मवीर शर्मा मानते हैं कि "वास्तविकता में उपभोक्ता को कितना अनाज बांटा गया, इसकी विभाग के पास जानकारी ही नहीं आती, लेकिन अब इसका भी रास्ता निकाल लिया गया है. प्रदेश की सभी पीडीएस दुकानों के तराजू को ई-पॉश मशीन से जोड़ा जा रहा है. इससे तुलाई मशीन से जैसे ही उपभोक्ता को अनाज तौलकर दिया जाएगा, उसकी जानकारी विभाग के सर्वर पर अपने-आप पहुंच जाएगी. अनाज तौलने से पहले ई पॉश मशीन में उपभोक्ता के फिंगर प्रिंट से उसकी पहचान की जाती है, इसलिए अनाज की जानकारी के साथ यह भी पता होगा कि किस उपभोक्ता को कितना अनाज दिया गया."

     

    एआई की मदद से पकड़ी जाएगी चोरी

    तुलाई मशीन से पॉश मशीनों को जोड़े जाने के बाद प्रदेश भर से इसका डाटा विभाग के पास पहुंचेगा. इस डाटा के साथ सर्वर पर खाद्यान का बाकी डाटा भी अपलोड होगा. एआई की मदद से इस डाटा का एनालिसिस होगा और जहां भी निर्धारित मात्रा से कम अनाज दिया जाएगा तो इससे जुड़ी एनफॉरर्मेशन अपने आप जनरेट होगी.

    फिंगरप्रिंट मिसमैच तो चेहरे से होगी पहचान

    आमतौर पर यह शिकायत होती है कि उपभोक्ता के फिंगर प्रिंट पॉश मशीनों में रीड नहीं हो रहे या हाथों की लकीरें मिट चुकी हैं. कमिश्नर कर्मवीर शर्मा कहते हैं कि "इस तरह की शिकायतों को देखते हुए अब इसका भी रास्ता निकाला गया है. ऐसी स्थिति में आंखों की पुतलियों और फेस रिकग्निशन से भी पहचान स्थापित कर राशन दिया जाएगा. इसके लिए व्यवस्था की जा रही है."

    गोडाउन से लेकर गाड़ियों तक की मॉनिटरिंग

    गोडाउन से लेकर पीडीएस की दुकानों तक पहुंचने के दौरान अनाज में किसी तरह की गड़बडी को रोकने के लिए अब परिवहन कार्य में लगे सभी 900 माल वाहक वाहनों को जीपीएस से जोड़ा गया है, जिससे अनाज लेकर निकलने वाले वाहनों की लगातार ऑनलाइन मॉनिटरिंग आसान हुई है. वहीं प्रदेश के सभी 250 वेयर हाउस पर भी अब सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं.

     

     

      गड़बड़ी के कई मामले आए सामने

      मार्च 2025 में भोपाल में शिकायत के बाद खाद्य विभाग की टीम ने संत हिरदाराम नगर की अनाज मंडी की एक दुकान की जांच की तो यहां 28 टीन फोर्टिफाइड चावल मिला. यह चावल राशन की दुकानों से गरीबों को बांटा जाना था लेकिन पीडीएस दुकान संचालक और सेल्समैन की मिलीभगत से इसे व्यापारी को बेच दिया गया. इस तरह की गड़बड़ियां प्रदेश भर में चल रही है.

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