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    ठंडे समुद्र में दो दिन तक जिंदगी की जंग, 15 वर्षीय किशोर की बची जान

    एंकरेज। अलास्का के बेहद बर्फीले और दुर्गम बेरिंग सागर में एक 15 वर्षीय किशोर ने अदम्य साहस और जिजीविषा का परिचय देते हुए करीब दो दिनों तक मौत को मात दी। समुद्र में अपनी छोटी नाव पलट जाने के बाद वह किशोर लगभग 48 घंटे तक उसके उल्टे पेंदे से चिपका रहा, जिसे बाद में मछली पकड़ने वाली एक नौका ने सुरक्षित बचा लिया। हालांकि, इस दर्दनाक हादसे में किशोर के बड़े भाई और एक अन्य रिश्तेदार की जान नहीं बचाई जा सकी।

    हादसे में रिश्तेदार फिसला, दो शव बरामद

    बचावकर्मियों को दिए बयान में किशोर ने बताया कि नाव पलटने के बाद शुरुआती समय में वह और उसका रिश्तेदार दोनों ही उल्टी नाव को मजबूती से थामे हुए थे। लेकिन भीषण ठंड, तेज लहरों और लगातार घटती शारीरिक ऊर्जा के कारण उसका रिश्तेदार अपनी पकड़ खो बैठा और गहरे पानी में समा गया। खोज एवं बचाव दल ने बाद में किशोर के बड़े भाई और रिश्तेदार दोनों के शव बरामद कर लिए।

    10 डिग्री तापमान और घुप अंधेरे में दिखाई हिम्मत

    किशोर को सकुशल निकालने वाली मछली पकड़ने वाली नौका 'द नॉर्थवेस्ट एक्सप्लोरर' के कप्तान एडम व्हाइट ने बताया कि करीब 10 डिग्री सेल्सियस तापमान और घने अंधेरे के बावजूद किशोर ने हिम्मत नहीं हारी। रेस्क्यू के वक्त किशोर ठंड से बुरी तरह कांप रहा था, लेकिन उसकी मानसिक मजबूती ने ही उसकी जान बचाई। उसने तुरंत दल को बताया कि उसका भाई नाव के नीचे फंसा हुआ है और रिश्तेदार एक रात पहले ही बह गया था।

    लापता होने के बाद तटरक्षक बल ने छेड़ा अभियान

    यह परिवार सेंट लॉरेंस द्वीप के सुदूर सावूंगा गांव से शुक्रवार को मछली पकड़ने के लिए समुद्र में उतरा था और उन्हें रविवार की सुबह तक लौटना था। निर्धारित समय पर वापसी न होने पर रविवार रात परिजनों ने उनके लापता होने की सूचना दी। इसके तुरंत बाद अमेरिकी तटरक्षक बल ने सोमवार तड़के व्यापक खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया।

    सावूंगा समुदाय की रीढ़ है मछली का शिकार

    लगभग 800 की आबादी वाले सावूंगा गांव में हैलिबट मछली पकड़ना केवल आजीविका नहीं, बल्कि उनकी सदियों पुरानी सांस्कृतिक पहचान और जीवित रहने का आधार है। सीमित रोजगार विकल्पों के कारण यहां के लोग मछली पकड़कर आपस में बांटते हैं और एक-दूसरे का सहारा बनते हैं। किशोर की मौसी कोलन वॉकर के अनुसार, आधुनिकता के दौर में भी उनका समुदाय पारंपरिक तौर-तरीकों और आपसी सद्भाव से ही जीवन यापन करता है।

    पिता तुल्य भाई को खोने का गम

    परिजनों ने बताया कि बचाया गया किशोर डेरेक पार्कर अघनांगा अपने 35 वर्षीय बड़े भाई सिडनी कुलोवियी के साथ नियमित रूप से समुद्र में जाता था। पिता के निधन के बाद कुलोवियी ही उसके लिए अभिभावक की भूमिका निभा रहे थे। कुलोवियी एक अनुभवी व्यावसायिक कप्तान होने के साथ-साथ पूरे गांव में अपनी मिलनसार और मददगार छवि के लिए पहचाने जाते थे।

    हवाई निगरानी से मिली नाव की लोकेशन

    तटरक्षक बल के टोही विमान ने सोमवार सुबह समुद्र में मीलों दूर पलटी हुई नाव के ऊपर किशोर को जीवित देखा। विमान से फौरी तौर पर जरूरी जीवनरक्षक सामग्री नीचे गिराई गई और पास मौजूद व्यावसायिक नौका 'नॉर्थवेस्ट एक्सप्लोरर' को रेस्क्यू के लिए निर्देशित किया गया। जांच में सामने आया कि शनिवार की रात ही यह नाव अनियंत्रित होकर गहरे सागर में पलट गई थी।

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