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    खराब मौसम और गन्ने की कमी से चीनी उत्पादन में 18% की गिरावट, NFCSFL ने जताई गहरी चिंता

    व्यापार : इस साल भारत के चीनी उत्पादन में गिरावट देखने को मिली है। अक्टूबर में खत्म हो रहे मौजूदा सीजन में अब तक 2.58 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ। यह पिछले साल इसी समय की तुलना में 18.38 फीसदी कम है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSFL) ने बुधवार को यह जानकारी दी। उत्पादन में गिरावट का कारण गन्ने की उपलब्धता में कमी, खराब मौसम की स्थिति, इथेनॉल उत्पादन में वृद्धि, और कीट व रोग का प्रकोप रहा। 

    कुल उत्पादन 26.11 मिलियन टन पहुंचने की उम्मीद

    फेडरेशन को उम्मीद है कि पूरे में कुल उत्पादन 26.11 मिलियन टन तक पहुंच जाएगा। यह 2023-24 मे उत्पादित 31.9 मिलियन टन से काफी कम है। कर्नाटक और तमिलनाडु में जून से सितम्बर तक चलने वाले विशेष पेराई कार्य चल रहे हैं। इससे कुल उत्पादन में कुछ और टन की वृद्धि होने की उम्मीद है। कर्नाटक में पिछले साल एक मील की तुलना में इस साल सात मिलें चल रही हैं। वहीं तमिलनाडु में पिछले वर्ष 11 की तुलना में इस साल नौ मिलें चल रही हैं। 

    उत्तर प्रदेश में उत्पादन घटकर 9.27 मिलियन रहा गया

    NFCSFL के अनुसार भारत के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में जुलाई तक उत्पादन घटकर 9.27 मिलियन टन रह गया। यह एक वर्ष पूर्व इसी माह में 10.36 मिलियन टन था।  दूसरे सबसे बड़े उत्पादक महाराष्ट्र में उत्पादन में बड़ी गिरावट आई और यह 11 मिलियन से घटकर 8.09 मिलियन टन रह गया। वहीं कर्नाटक में उत्पादन 5.16 मिलियन टन से घटकर 4.06 मिलियन टन रह गया। 

    एथनॉल मिश्रण में का लक्ष्य पांच साल पहले हासिल हुआ

    इसके विपरीत भारत ने 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। यह 2030 के अपने मूल लक्ष्य से पांच साल पहले है। यह उपलब्धि ग्रामीण आय को बढ़ावा देते हुए ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के देश के प्रयासों को रेखांकित करती है।

    चीनी और एथनॉल के संतुलन को लेकर जताई गई चिंता

    NFCSFL ने कहा कि चीनी उद्योग में एथनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल में विविधता बढ़ रही है। हालांकि संगठन ने यह भी चेतावनी दी है कि जब स्टॉक ज्यादा होता है, तब गन्ने से एथनॉल बनाने की दीर्घकालिक टिकाऊ क्षमता पर सवाल उठते हैं। इससे भविष्य में चीनी और एथनॉल के संतुलन को बनाए रखना एक चुनौती बन सकता है।

    महाराष्ट्र में मल्टी-फीड डिस्टिलरी की स्थापना को मिली मंजूरी

    महाराष्ट्र ने 23 जुलाई को राज्य भर में मल्टी-फीड डिस्टिलरी की स्थापना को मंजूरी दे दी। यह राष्ट्रीय जैव ऊर्जा नीति और भारत के इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम के अनुरूप है। इसका लक्ष्य अब 2030 तक 30 प्रतिशत सम्मिश्रण करना है।

    त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की उम्मीद 

    निर्यात कोटा की घोषणा के बाद मिलों में चीनी की कीमतें 3,900 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास रहीं, लेकिन मई के मध्य से इसमें गिरावट का रुख रहा। फेडरेशन ने कहा कि त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग से कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है, जो ऑफ-सीजन रखरखाव करने वाली मिलों के लिए महत्वपूर्ण है।

    वित्त वर्ष 2026 में 35 मिलियन टन चीनी उत्पादन की संभावना

    भविष्य को देखते हुए, एनएफसीएसएफएल ने अनुकूल मानसून, महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की खेती में वृद्धि और सरकार द्वारा उचित एवं लाभकारी मूल्य में समय पर की गई बढ़ोतरी का हवाला देते हुए 2025-26 में 35 मिलियन टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया है।

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