हत्याकांड के करीब सात साल बाद आया फैसला, गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि; 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी
अलवर। अपर जिला एवं सैशन न्यायाधीश संख्या-3, अलवर की अदालत ने वर्ष 2019 के बहुचर्चित हत्या और मारपीट के मामले में फैसला सुनाते हुए 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने धारा 302/149 के तहत सभी 10 दोषियों को आजीवन कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। मामले में अन्य धाराओं के तहत भी अलग-अलग सजा सुनाई गई है।
सरकारी वकील अजीत यादव के अनुसार सैशन प्रकरण संख्या 61/2018 में अदालत ने गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया। मामला 17 जून 2019 की शाम करीब 6 बजे गुर्जरपुर खुर्द क्षेत्र का है।
गुर्जरपुर खुर्द में हुआ था विवाद
अभियोजन के अनुसार घटना के समय भीमवती अपनी बोरिंग पर अकेली थी। आरोप है कि प्रकाश, कुर्शीद, सुनील, वीरवती, करण सिंह, ओमसिंह, भीमसिंह, कश्मीर, धनसिंह, लालाराम, मेवाराम, अजीत, रोहताश, गब्बर, मुकेश सहित अन्य लोग वहां पहुंचे और भीमवती के साथ मारपीट एवं अभद्रता करने लगे।
शोर सुनकर मौके पर पहुंचे लोगों के साथ भी मारपीट की गई। घटना में कई लोग घायल हुए। इसी दौरान बंशीलाल को गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उनकी मौत हो गई।
फरसी से वार करने की गवाही
मामले में गवाह कंवरपाल ने अदालत के समक्ष बयान दिया कि उसके पिता बंशीलाल के सिर पर फरसी से वार किए गए थे। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को प्रस्तुत किया।
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर 10 अभियुक्तों को हत्या के मामले में दोषी माना और उनके खिलाफ कठोर सजा सुनाई।
हत्या के साथ मारपीट की धाराओं में भी सजा
अदालत ने धारा 302/149 के तहत 10 दोषियों को आजीवन कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
इसके अलावा:
- धारा 325/149: तीन वर्ष कठोर कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड।
- धारा 148: एक वर्ष कठोर कारावास और 2 हजार रुपये अर्थदंड।
- धारा 323/149: एक वर्ष साधारण कारावास और 1 हजार रुपये अर्थदंड।
- धारा 336: तीन माह साधारण कारावास और 200 रुपये अर्थदंड।
- धारा 341: एक माह साधारण कारावास और 100 रुपये अर्थदंड।
अर्थदंड जमा नहीं कराने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
करीब सात साल बाद आया अदालत का फैसला
वर्ष 2019 में हुई इस घटना के करीब सात साल बाद अदालत का फैसला आया है। सरकारी वकील अजीत यादव ने बताया कि मामले में अदालत ने गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को सजा सुनाई।
फैसले को पीड़ित परिवार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हत्या के मामले में 10 आरोपियों को आजीवन कठोर कारावास की सजा मिलने से लंबे समय से चल रहे इस प्रकरण का न्यायिक स्तर पर महत्वपूर्ण पड़ाव सामने आया है।
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