More
    Homeधर्म-समाजकेले के पत्ते पर सजते हैं 26 पकवान! जानें ओणम साध्या की...

    केले के पत्ते पर सजते हैं 26 पकवान! जानें ओणम साध्या की अनोखी परंपरा और राजा महाबली की कहानी

    समय के साथ त्योहार मनाने का तरीका जरूर बदला है, लेकिन केरल ने ओणम की एक खास परंपरा को आज भी पूरी मजबूती से संभालकर रखा है. यह है ओणम साध्या… इसमें केले के पत्ते पर 26 तरह के पकवान परोसे जाते है. ओणम का त्योहार यूं तो कई दिनों तक चलता है, लेकिन सबसे खास दिन वह माना जाता है, जब परिवार एक साथ बैठकर ओणम साध्या का आनंद लेते हैं. केरल के घरों की रसोई में इन दिनों खूब चहल-पहल रहती है. तरह-तरह के पकवान तैयार किए जाते हैं और केले के बड़े पत्ते पर उन्हें एक तय क्रम में सजाया जाता है. 10 दिवसीय ओणम उत्सव का अंतिम थिरुवोणम के दिन होता है, जो कि इस साल 26 अगस्त दिन बुधवार को है.

    राजा महाबली के दौर से जुड़ी है कहानी
    ओणम को केरल के सबसे खास त्योहारों में गिना जाता है. इसे अलग-अलग जाति, धर्म और सामाजिक वर्ग के लोग मनाते हैं. इस त्योहार के पीछे राजा महाबली के उस दौर की कहानी जुड़ी है, जब लोगों के बीच बराबरी, खुशहाली और सुख-समृद्धि की बात कही जाती है. ओणम पर उस पुराने दौर की याद और भावना आज भी लोगों के बीच दिखाई देती है.
    पूरा परिवार एक ही जगह होता है इकट्ठा
    केरल के परिवारों का ढांचा भी अब काफी बदल गया है. पहले बड़े-बड़े पुश्तैनी घरों में कई भाई-बहन, उनके बच्चे और रिश्तेदार एक साथ रहते थे. त्योहार के मौके पर पूरा परिवार एक ही जगह इकट्ठा होता और लंबी कतार में बैठकर खाना खाता था. अब ऐसे बड़े संयुक्त परिवार कम हो गए हैं. लोग नौकरी और पढ़ाई के लिए अलग-अलग शहरों और देशों में रहने लगे हैं. इसके बावजूद, ओणम परिवार को फिर से जोड़ने का एक मौका बन जाता है. कई लोग त्योहार के समय अपने घर लौटते हैं और परिवार के साथ साध्या खाते हैं.

    ओणम साध्या में करीब 26 तरह के पकवान
    ओणम साध्या की सबसे खास बात इसकी लंबी थाली है. इसमें करीब 26 तरह के पकवान शामिल होते हैं. केले के पत्ते पर पहले चावल और दाल से लेकर घी, सांभर, अवियल, थोरन, ओलन, कलान, एरिसेरी, अचार, पचड़ी, खिचड़ी, पापड़, केले और केले के चिप्स जैसी चीजें परोसी जाती हैं. आखिर में अलग-अलग तरह की पायसम दिए जाते है. साध्या केरल की पारंपरिक रसोई की पूरी झलक है. एक ही पत्ते पर मीठा, खट्टा, नमकीन और मसालेदार स्वाद मिलते हैं. खास बात यह है कि हर व्यंजन को परोसने की भी अपनी परंपरा है.

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here