मंगल प्रवचनों के दौरान मुनि विमर्शसागर महाराज ने कर्म सिद्धांत और आत्मचिंतन का महत्व बताया
तिजारा (अलवर)। श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र, देहरा तिजारा में परम पूज्य भावलिंगी संत मुनि श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज के ससंघ पावन चातुर्मास के अंतर्गत प्रतिदिन आयोजित किए जा रहे मंगल प्रवचनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं। गुरुदेव के ओजस्वी और ज्ञानवर्धक प्रवचनों से श्रद्धालुओं में धर्म, संयम और आत्मकल्याण के प्रति आस्था लगातार बढ़ रही है।

मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन और प्रचार मंत्री उमंग जैन ने बताया कि मंगल प्रवचन के दौरान गुरुदेव ने कहा कि भगवान सर्वज्ञ तीर्थंकर देव ने अपनी दिव्यध्वनि में जीवों के दो निवास स्थान बताए हैं। इनमें पहला संसार और दूसरा मोक्ष है। संसार में रहने वाला प्रत्येक जीव अपने संचित कर्मों के अनुसार चारों गतियों में भ्रमण करता है और उन्हीं कर्मों के आधार पर सुख और दुःख का अनुभव करता है।
उन्होंने कहा कि भगवान तीर्थंकरों ने अपने उपदेशों के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि मनुष्य के सुख और दुःख का कारण कोई दूसरा व्यक्ति नहीं होता। प्रत्येक जीव अपने शुभ और अशुभ कर्मों का फल स्वयं भोगता है। इसलिए मनुष्य को सदैव संयम, साधना, आत्मचिंतन और धर्म आराधना के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।
गुरुदेव ने कहा कि जीवन की सार्थकता बाहरी वैभव में नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और उत्तम कर्मों के संचय में निहित है। जब व्यक्ति अपने भीतर झांकता है और अपने कर्मों को सुधारने का प्रयास करता है, तभी वह आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ पाता है।
प्रवचन के समापन के बाद श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के श्रीचरणों में विनय अर्पित करते हुए धर्म साधना और संयम का पालन करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, महामंत्री नरेंद्र जैन, चातुर्मास समिति के अध्यक्ष सुरेश जैन (पटेल), प्रचार मंत्री उमंग जैन, संजय जैन, अंकित जैन, सुरेंद्र जैन, चिराग जैन, रवि जैन, अंशुल जैन और वरुण जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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