More
    Homeराज्ययूपीनेपाल में हिंदू राष्ट्र की वापसी की मांग तेज, कई इलाकों में...

    नेपाल में हिंदू राष्ट्र की वापसी की मांग तेज, कई इलाकों में बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

    बहराइच| पड़ोसी देश नेपाल में लगभग 18 साल के लंबे अंतराल के बाद हिंदू राष्ट्र की मांग एक बार फिर सड़कों से लेकर राजनीतिक गलियारों के मुख्य केंद्र तक आ पहुंची है। सुनसरी जिले के देवानगंज में हाल ही में हुए धार्मिक तनाव और विवाद ने इस मांग को एक नई तीव्रता प्रदान की है। राजधानी काठमांडू से लेकर तराई क्षेत्र और भारत से लगी सीमावर्ती पट्टियों तक हर तरफ 'हिंदू राष्ट्र' बनाने के स्वर गूंजने लगे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अब इसे मात्र एक धार्मिक मुद्दा नहीं माना जा रहा, बल्कि यह नेपाल की मूल सांस्कृतिक पहचान, प्राचीन परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा एक बड़ा विषय बन गया है।

    राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP) लंबे अरसे से नेपाल को पुनः आधिकारिक रूप से हिंदू राष्ट्र घोषित करने और वहां संवैधानिक राजशाही की वापसी की पुरजोर समर्थक रही है। इस साल मई में पार्टी की मुख्य सचेतक खुशबू ओली ने संसद के भीतर संविधान संशोधन प्रक्रिया में सनातन हिंदू राष्ट्र और राजशाही के मुद्दों को प्रमुखता से शामिल किए जाने की मांग उठाई थी। इसके अलावा, इसी साल हुए चुनावों में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने 275 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा में 182 सीटों पर बड़ी जीत हासिल की थी। हालांकि, देश में दोबारा हिंदू राष्ट्र की शासन व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने के लिए संसद में संविधान संशोधन और तमाम राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति बनना अनिवार्य होगा।

    विभिन्न सामाजिक संगठनों का भी मिल रहा समर्थन

    केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि विश्व हिंदू परिषद और हिंदू स्वयंसेवक संघ जैसे कई प्रतिष्ठित संगठन भी नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाए जाने के मुखर समर्थक हैं। विश्व हिंदू परिषद नेपाल के मातृशक्ति विभाग की अध्यक्षा कृष्णा पांडे के मुताबिक, इसी साल मई माह में सरकार के समक्ष वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना के संबंध में कई ठोस सुझाव प्रस्तुत किए गए थे, और काठमांडू में मंत्रालय स्तर पर उच्चस्तरीय बैठकें भी आयोजित हुई थीं।

    लगभग 240 वर्षों तक रहा था हिंदू राजशाही देश

    इतिहास पर नजर डालें तो नेपाल सन 1768 से लेकर 2008 तक यानी लगभग 240 वर्षों तक दुनिया का एकमात्र आधिकारिक हिंदू राजशाही राष्ट्र रहा था। हालांकि, वर्ष 2007 के अंतरिम संविधान में बदलाव कर इसे एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित कर दिया गया और अंततः 28 मई 2008 को औपचारिक रूप से राजशाही का अंत करके देश को लोकतांत्रिक गणराज्य बना दिया गया।

    सुनसरी हिंसा मामले में फायरिंग के तकनीकी पहलुओं की होगी जांच

    दूसरी ओर, नेपाल के सुनसरी जिले के कप्तानगंज में गत 27 जुलाई को दो समुदायों के मध्य भड़की हिंसक झड़प की जांच अब बहुत गहराई तक पहुंच चुकी है। इस पूरे प्रकरण में पुलिस द्वारा की गई फायरिंग के तकनीकी पहलुओं की समीक्षा के लिए गृह मंत्रालय के सहसचिव भूपेंद्र थापा के नेतृत्व में एक पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है। इस समिति ने घटनास्थल का दौरा करने के साथ-साथ घायलों और चश्मदीदों से साक्ष्य एकत्र करने शुरू कर दिए हैं। यह कमेटी मुख्य रूप से हिंसा के मूल कारणों, सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया, प्रशासनिक स्तर पर हुई चूक और किन परिस्थितियों में गोलियां चलानी पड़ीं, इन सभी बिंदुओं की बारीकी से जांच कर रही है।

    गोलीबारी से जुड़े बैलिस्टिक और फोरेंसिक सबूतों की वैज्ञानिक जांच के लिए पुलिस निरीक्षक दीपेश अवस्थी और उपनिरीक्षक मोहनसिंह धामी को विशेष तौर पर इस समिति में शामिल किया गया है। इस जांच का सबसे संवेदनशील बिंदु यह परिकल्पित करना है कि सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलीबारी स्थापित नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के दायरे में थी या नहीं। इस दुर्भाग्यपूर्ण हिंसक घटना में 24 वर्षीय ओमप्रकाश मेहता की जान चली गई थी, जबकि नौ अन्य नागरिकों समेत कई लोग जख्मी हुए थे। इस घटना के बाद प्रशासनिक अमले में फेरबदल करते हुए ईश्वरी प्रसाद अर्याल को सुनसरी का नया प्रमुख जिला अधिकारी नियुक्त किया गया है, साथ ही नेपाल पुलिस, सशस्त्र बल, सेना और राष्ट्रीय जांच विभाग की सतर्कता को भी काफी बढ़ा दिया गया है।

    मानवाधिकार आयोग भी कर रहा निष्पक्ष जांच

    उधर, सिरहा जिले के गोलबजार में बीते 30 जुलाई को एक विरोध प्रदर्शन के दौरान 15 वर्षीय किशोर गणेश यादव की मौत के मामले की अलग से कानूनी जांच चल रही है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने भी सुनसरी की घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए अपनी स्वतंत्र जांच शुरू कर दी है। आयोग की एक विशेष टीम ने स्थानीय प्रशासन, पुलिस अधिकारियों, अस्पताल प्रबंधन और प्रभावित परिवारों से मिलकर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी जुटाई है।

    वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने संवेदनशील जिलों में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने के साथ-साथ आपसी संवाद और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया है। राहत की बात यह है कि कप्तानगंज में हालात अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। मुख्य राजमार्ग क्षेत्र से कर्फ्यू पूरी तरह हटा लिया गया है, हालांकि एहतियात के तौर पर अति-संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की पैनी नजर लगातार बनी हुई है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here