नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के संभावित कनाडा दौरे को लेकर वहां की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) के कुछ सांसदों द्वारा उनके प्रवेश पर रोक लगाने और प्रतिबंध की मांग किए जाने के बाद, इंडो-कैनेडियन समुदाय ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।
NDP सांसदों की मांग और आपत्तियां
कनाडा में एनडीपी (NDP) की सांसदों हीथर मैकफर्सन और जेनी क्वान ने वहां के प्रधानमंत्री और संबंधित मंत्रियों को पत्र लिखकर मोहन भागवत के दौरे पर आपत्ति जताई है। उन्होंने संघ को लेकर कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए इसके सदस्यों के प्रवेश पर रोक लगाने और संगठन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उनका तर्क है कि इससे अल्पसंख्यकों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।
इंडो-कैनेडियन समुदाय का काउंटर-लेटर अभियान
सांसदों की इस मांग के विरोध में इंडो-कैनेडियन समुदाय ने एक काउंटर-लेटर अभियान शुरू किया है। समुदाय का कहना है कि किसी बड़े सांस्कृतिक और स्वयंसेवी संगठन को बिना किसी ठोस और सत्यापित प्रमाण के इस तरह 'फासीवादी' बताना भेदभावपूर्ण है। उनका यह भी मानना है कि इस प्रकार की बयानबाजी से कनाडा में रहने वाले समूचे हिंदू समुदाय के प्रति अनावश्यक संदेह और अविश्वास का माहौल बन सकता है।
दो दशक बाद प्रस्तावित है दौरा
गौरतलब है कि करीब दो दशक के अंतराल के बाद किसी संघ प्रमुख का यह कनाडा दौरा प्रस्तावित है। इससे पहले वर्ष 2005 में तत्कालीन प्रमुख के.एस. सुदर्शन कनाडा गए थे। मौजूदा कार्यक्रम के तहत भागवत के टोरंटो में प्रवासी भारतीयों के साथ बैठकें और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होने की योजना है, जिसके बाद उनके अमेरिका जाने का भी कार्यक्रम है।


