अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर नगर निगम की सामान्य सभा की मंगलवार को आयोजित बैठक की शुरुआत के साथ ही भारी हंगामा देखने को मिला। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विभिन्न मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई और बैठक को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा। इस दौरान महापौर के एक बयान ने खासी सुर्खियां बटोरीं, जिसमें उन्होंने कहा कि वह "मेहंदी लगाकर नहीं बैठी हैं।"
महापौर और नेता प्रतिपक्ष के बीच तीखी बहस
बैठक के दौरान महापौर मंजूषा भगत और नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद के बीच विभिन्न विकास कार्यों और व्यवस्थाओं को लेकर जमकर बहस हुई। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर गंभीर आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए, जिससे सदन का माहौल गर्मा गया।
हंगामे के बीच महापौर मंजूषा भगत ने विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि विपक्ष उन्हें महिला महापौर समझकर बार-बार निशाना बना रहा है। उन्होंने शहर के विकास के लिए मिले लगभग 100 करोड़ रुपये का जिक्र करते हुए कहा कि जब विकास कार्यों के लिए भारी-भरकम राशि आई है, तो इससे विपक्ष के पेट में दर्द हो रहा है। शहर की जर्जर सड़कों को लेकर उठे सवालों पर महापौर ने स्वीकार किया कि कुछ सड़कें खराब हैं, जिसके लिए उन्होंने जनता से माफी मांगी और आश्वासन दिया कि आगामी दो महीनों के भीतर शहर की सभी सड़कों को दुरुस्त करवा दिया जाएगा।
पेयजल घोटाला और रिश्वत मांगने का ऑडियो छाया रहा
दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए पेयजल व्यवस्था में बड़े पैमाने पर घोटाले का आरोप लगाया। इसके अलावा, बैठक में कलाकेंद्र मैदान को किराए पर देने के एवज में कथित तौर पर रिश्वत मांगने से जुड़ा एक वायरल ऑडियो का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। नेता प्रतिपक्ष ने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराकर इसमें संलिप्त दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।
इसी ऑडियो और अन्य स्थानीय मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों के पार्षद आमने-सामने आ गए और सदन में जबरदस्त हंगामा शुरू हो गया। हालात को नियंत्रित करने के लिए बैठक को फिलहाल स्थगित करना पड़ा, और अब सदन में उठे इन तमाम गंभीर मुद्दों तथा वायरल ऑडियो की जांच पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।


