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    छत्तीसगढ़ का हरेली पर्व: खेत-खलिहान से लेकर घर-आंगन तक दिखती है लोक परंपरा की झलक

    रायपुर: छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और माटी से जुड़े महापर्व 'हरेली' का त्योहार आज राज्य भर में बेहद हर्षोल्लास और पारंपरिक धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में भी सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक भव्य हरेली उत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खुद शामिल होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पारंपरिक रूप से कृषि उपकरणों की पूजा-अर्चना कर प्रदेश के किसानों के लिए बेहतरीन फसल और खुशहाली की कामना करेंगे। इस पावन पर्व पर छत्तीसगढ़ के गांवों से लेकर शहरों तक गेड़ी दौड़, फुगड़ी और विभिन्न पारंपरिक खेलों की धूम देखने को मिल रही है।

    हरियाली और लोक संस्कृति का प्रतीक है हरेली

    हरेली का यह पावन पर्व छत्तीसगढ़ की प्राचीन कृषि संस्कृति और समृद्ध लोक परंपराओं का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। हर साल सावन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को हरेली तिहार मनाया जाता है। 'हरेली' शब्द मूल रूप से हरियाली का ही परिचायक है। वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही पूरी धरती हरी चादर ओढ़ लेती है और चारों तरफ का वातावरण प्राकृतिक रूप से हरा-भरा नजर आने लगता है। इस समय तक खरीफ फसलों की बुवाई और खेती-किसानी का शुरुआती दौर लगभग पूरा हो जाता है, जिसकी खुशी में यह उत्सव मनाया जाता है।

    त्योहार पर निभाई जाती हैं विशेष रस्में

    हरेली के इस खास दिन पर सुबह से ही ग्रामीण अंचलों और किसान परिवारों में विशेष उत्साह देखा जाता है। सुबह तड़के लोग तालाब जाकर अपने गोधन—यानी गाय, बैल, बछड़ों और मवेशियों को नहलाते हैं। इसके साथ ही खेती-किसानी में उपयोग होने वाले उपकरण जैसे हल (नांगर), कुदाली, फावड़ा और गैंती को अच्छी तरह धोकर साफ किया जाता है।

    इसके पश्चात घरों के आंगन में गोबर से लीपकर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। घरों में माताएं और बहनें गुड़ का चीला समेत कई पारंपरिक पकवान तैयार करती हैं। सबसे पहले घर के देवी-देवताओं और कुल देवता की पूजा की जाती है, जिसके बाद ग्रामीण अपने आराध्य ठाकुरदेव की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं।

    पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद

    हरेली तिहार के इस विशेष अवसर पर घर-घर की रसोइयों में छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की महक गूंजती है। गृहणियां अपने चूल्हे-चौके पर पारंपरिक पकवान तैयार करती हैं, जिनमें ठेठरी, खुरमी, गुड़ और आटे का चीला, फरा, मुठिया, धुसका, अंगाकर रोटी, बफौरी (सादा और मिक्स दाल), चौंसेला और पातर चांउर रोटी जैसे लजीज पकवान शामिल होते हैं, जिनका परिवार के सभी सदस्य मिलकर आनंद लेते हैं।

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