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    PM किसान निधि के लिए दर-दर भटक रहा 93 साल का किसान, सरकारी रिकॉर्ड में पहले ही हो चुकी मौत

    मऊगंज: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिले के सरकारी रिकॉर्ड में एक पूरी तरह जीवित किसान को चार साल पहले ही मृत घोषित कर दिया गया है, जिसके चलते अब वह बुजुर्ग अपनी जिंदगी का प्रमाण पत्र लेकर सरकारी दफ्तरों की चौखट पर भटकने को मजबूर हैं। यह पूरा मामला मऊगंज जिले की नईगढ़ी तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम हटवा सेंगर का है, जहां 93 वर्षीय किसान लालमणि मिश्रा को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) के सरकारी पोर्टल और रिकॉर्ड में वर्ष 2021 से मृत दर्ज दिखाया जा रहा है। कागजी भूल के कारण यह बुजुर्ग किसान पिछले चार वर्षों से लगातार योजना की किस्तों से वंचित चले आ रहे हैं।

    खेत में खुद कर रहे हैं खेती, कागजों में बता दिया मृत

    93 वर्षीय किसान लालमणि मिश्रा का कहना है कि वह शारीरिक रूप से पूरी तरह जीवित हैं और आज भी अपने खेतों में उतरकर खुद खेती-किसानी का काम संभालते हैं। इसके बावजूद सरकारी दस्तावेजों में मृत दर्ज किए जाने के कारण उनका डीबीटी (DBT) लिंक फेल हो गया और उनके बैंक खाते में आने वाली पीएम किसान सम्मान निधि की किस्तें आनी बंद हो गईं। इस बुजुर्ग किसान के लिए सबसे बड़ा मानसिक कष्ट यह है कि अपनी आंखों के सामने अपनी वास्तविक स्थिति और जीवंतता दिखाने के बाद भी स्थानीय स्तर पर उनकी इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला जा सका।

    शिकायतों के बाद भी नहीं पसीजा सिस्टम

    पीड़ित किसान के अनुसार, उन्होंने इस गंभीर त्रुटि को सुधारने के लिए अधिकारियों के सामने गुहार लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने अपनी इस समस्या को लेकर तीन बार सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, दो बार नईगढ़ी तहसीलदार को लिखित आवेदन दिया और करीब चार से पांच बार स्थानीय पटवारी से भी गुहार लगाई। अनगिनत बार चक्कर काटने और अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाने के बावजूद जब रिकॉर्ड में सुधार नहीं हुआ, तो आखिरकार 93 साल के इस बुजुर्ग को मंगलवार शाम मऊगंज कलेक्ट्रेट पहुंचना पड़ा। वहां उन्होंने अपर कलेक्टर पीके पांडे को विस्तृत आवेदन सौंपकर खुद के जीवित होने का प्रमाण दिया और न्याय की गुहार लगाई।

    बायोमेट्रिक और केवाईसी (KYC) की नई तकनीकी मुसीबत

    किसान की मुश्किलें केवल कागजी मौत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उम्र के इस पड़ाव पर उनके सामने तकनीकी परेशानियां भी खड़ी हो गई हैं। अत्यधिक वृद्धावस्था के कारण केवाईसी और आधार सत्यापन के वक्त उनके फिंगरप्रिंट (अंगूठे के निशान) मैच नहीं हो पा रहे हैं, जिसके कारण बैंकिंग और डिजिटल प्रक्रिया पूरी करने में भारी दिक्कत आ रही है। एक तरफ सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत बताकर हक छीना जा रहा है, तो दूसरी तरफ उम्रदराज होने के कारण डिजिटल सत्यापन की यह बाधा उनके लिए एक और बड़ी चुनौती बन गई है।

    वैकल्पिक केवाईसी और रुकी किस्तों के भुगतान की मांग

    किसान लालमणि मिश्रा ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि उनका तत्काल भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया जाए ताकि सरकारी दस्तावेजों में उन्हें फिर से 'जीवित' दर्ज किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि फिंगरप्रिंट न आने की स्थिति में आइरिस (आंख की पुतली), ओटीपी (OTP) या अन्य वैकल्पिक केवाईसी माध्यमों का उपयोग करके सत्यापन की सुविधा दी जाए, जिससे उनका रुका हुआ डीबीटी दोबारा एक्टिव हो सके।

    इसके अलावा, किसान ने वर्ष 2021 से अब तक रोकी गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की सभी किस्तों का एरियर के रूप में भुगतान करने की मांग भी की है। पीएम-किसान आईडी (PM-KISAN ID MP284794340) वाले बुजुर्ग लालमणि मिश्रा अब प्रशासन से केवल यही उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी व्यथा पर त्वरित कार्रवाई होगी, ताकि 93 साल की उम्र में उन्हें अपने जिंदा होने की गवाही देने के लिए सरकारी दफ्तरों के और चक्कर न काटने पड़ें और उनका हक उन्हें सुरक्षित मिल सके।

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