नई दिल्ली। आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा की गई टिप्पणी पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बयान के विरोध में 'Change.org' प्लेटफॉर्म पर शुरू की गई ऑनलाइन याचिका को व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिस पर हस्ताक्षर करने वालों का आंकड़ा 14 हजार के पार पहुँच गया है। याचिकाकर्ताओं ने लोकसभा अध्यक्ष से इस संसदीय आचरण पर ध्यान देने का अनुरोध किया है, साथ ही प्रियंका गांधी से अपना बयान वापस लेकर सार्वजनिक तौर पर खेद जताने का आग्रह किया है।
वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक समुदाय का समर्थन
1 अगस्त से शुरू हुई इस ऑनलाइन याचिका को देश के विभिन्न राज्यों व अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा समर्थन मिला है। लगभग 38 से अधिक देशों में कार्यरत भारतीय मूल के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने इस याचिका पर हस्ताक्षर कर अपनी असहमति दर्ज कराई है। शिक्षा और शोध जगत का मानना है कि यह विषय देश के पूरे वैज्ञानिक समुदाय के सम्मान और पेशेवर गरिमा से सीधा जुड़ा हुआ है।
संसदीय टिप्पणी से भड़का विवाद
यह पूरा घटनाक्रम संसद सत्र के दौरान हुआ, जब भाषण के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने आईआईटी मद्रास के निदेशक के संदर्भ में 'गोमूत्र एक्सपर्ट' शब्द का प्रयोग किया। याचिका में इस टिप्पणी को बेहद अपमानजनक और व्यक्तिगत हमला करार दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि किसी भी शिक्षाविद या वैज्ञानिक की नीतियों और विचारों की आलोचना तर्कों व तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत कटाक्ष के जरिए। इस प्रकार की भाषा से संस्थान की प्रतिष्ठा और पद की गरिमा दोनों प्रभावित होती हैं।
सार्वजनिक विमर्श की मर्यादा पर उठ रहे सवाल
याचिका के माध्यम से लोकसभा अध्यक्ष से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई है। इस घटनाक्रम के बाद देश की राजनीति में जन-प्रतिनिधियों की भाषा शैली, संसदीय मर्यादा और शीर्ष वैज्ञानिक-शैक्षणिक संस्थानों के प्रति इस्तेमाल की जाने वाली शब्दावली पर एक व्यापक चर्चा छिड़ गई है।


