इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर जिले से प्रशासनिक पद के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ एक ग्राम पंचायत सचिव ने अपने शासकीय पद का गलत इस्तेमाल करते हुए अपने ही बेटे की गाड़ी को पंचायत के आधिकारिक कार्यों के लिए अटैच करवा लिया। हैरान करने वाली बात यह है कि इस वाहन को लगाने के लिए न तो कोई टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई और न ही ग्रामसभा से कोई अनुमति ली गई, इसके बावजूद सरकारी खजाने से लगातार किराए का भुगतान भी कराया जाता रहा। इस मामले की शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने गहन जाँच की और सत्यता पाए जाने पर तत्कालीन सचिव, तत्कालीन सरपंच और वाहन मालिक (सचिव के बेटे) के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया है।
बिना टेंडर और नियमों को ताक पर रखकर लगाई गाड़ी
लोकायुक्त पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला इंदौर जिले की ग्राम पंचायत बांक से जुड़ा हुआ है। लोकायुक्त एसपी डॉ. राजेश सहाय को एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसकी प्रारंभिक जाँच में यह खुलासा हुआ कि तत्कालीन पंचायत सचिव प्रहलाद नील ने अपने पद का प्रभाव डालते हुए अपने बेटे धीरज नील की चार पहिया गाड़ी (वाहन क्रमांक MP-10 G-1435) को पंचायत में सफाई और अन्य प्रशासनिक कार्यों के नाम पर अटैच करवा दिया था। सचिव ने तत्कालीन सरपंच लक्ष्मीबाई पति राधेश्याम चौहान के साथ मिलकर इस वाहन के किराए के भुगतान से जुड़े प्रस्तावों पर अपने हस्ताक्षर भी किए।
सरकारी निधि से हुआ नियमों के विरुद्ध भुगतान
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पंचायत में वाहन किराए पर लेने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं यानी ओपन टेंडर का बिल्कुल पालन नहीं किया गया था और न ही इस संबंध में कभी कोई ग्रामसभा बुलाई गई थी। नियमों को दरकिनार कर पंचायत निधि से वाहन मालिक यानी सचिव के बेटे धीरज नील को नियमित रूप से किराए की राशि का भुगतान किया जाता रहा। लोकायुक्त पुलिस का कहना है कि सचिव ने अपने आधिकारिक पद पर रहते हुए अपने पारिवारिक और व्यक्तिगत हितों को साधने का काम किया, जिससे उनके बेटे को अनुचित आर्थिक लाभ पहुँचा है।
तीनों आरोपियों के खिलाफ संगीन धाराओं में केस दर्ज
लोकायुक्त द्वारा की गई इस विस्तृत जाँच और साक्ष्यों के आधार पर तत्कालीन पंचायत सचिव प्रहलाद नील, तत्कालीन सरपंच लक्ष्मीबाई राधेश्याम चौहान और वाहन मालिक सह सचिव के पुत्र धीरज नील—तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए), 13(2) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) के तहत औपचारिक रूप से प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। लोकायुक्त पुलिस इस पूरे मामले की आगे की कानूनी जाँच में जुटी हुई है। इस कार्रवाई के बाद से एक बार फिर से ग्रामीण अंचलों की पंचायतों में सरकारी निधियों के इस्तेमाल, वित्तीय पारदर्शिता और जनप्रतिनिधियों व कर्मचारियों की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।


