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    अंतिम सफर में भी परेशानी, शव लेकर नदी में उतरने को मजबूर हुए ग्रामीण

    दमोह: मध्य प्रदेश में विकास और बुनियादी ढांचों के बड़े-बड़े दावों के बीच दमोह जिले से शासन-प्रशासन की व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाली एक संवेदनशील तस्वीर सामने आई है। यहां मूलभूत सुविधाओं के अभाव में इंसान को मृत्यु के पश्चात अंतिम संस्कार के लिए भी भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। मामला दमोह-जबलपुर स्टेट हाईवे पर स्थित ग्राम सिंगरामपुर का है, जहां मुक्तिधाम तक जाने के लिए ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार करनी पड़ रही है।

    नदी पर पुलिया न होने से उपजा बड़ा संकट

    आजादी के दशकों बाद भी सिंगरामपुर गांव के निवासी बुनियादी सुविधाओं की बाट जोह रहे हैं। गांव के समीप बहने वाली नदी के दूसरी ओर श्मशान घाट स्थित है, लेकिन नदी पर एक छोटी पुलिया तक का निर्माण नहीं कराया गया है। स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, किंतु स्थिति जस की तस बनी हुई है। जब भी गांव में किसी ग्रामीण का निधन होता है, तो परिजनों और ग्रामीणों को शव का दाह-संस्कार करने के लिए नदी के बहते पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है।

    मानसून के दौरान थम जाता है अंतिम संस्कार

    सामान्य दिनों में तो ग्रामीण किसी तरह नदी पार कर लेते हैं, लेकिन बारिश के मौसम में यह समस्या भयावह रूप ले लेती है। मानसून के दौरान जब नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है या बहाव तेज होता है, तब ग्रामीणों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। जलस्तर अधिक होने की स्थिति में शव को घंटों या कभी-कभी पूरा दिन घर पर ही रखकर पानी कम होने का इंतजार करना पड़ता है। नदी का प्रवाह धीमा होने के पश्चात ही ग्रामीण जोखिम उठाकर शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट तक ले जा पाते हैं।

    जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उपेक्षा से आक्रोश

    गांव के लोगों का कहना है कि नदी पर केवल एक छोटी पुलिया के निर्माण से इस जटिल समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। वर्षों से शासन-प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित कराने के बावजूद आज तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। विकास के दावों के बीच मूलभूत सुविधाओं से वंचित ये ग्रामीण अब सिस्टम से जल्द से जल्द राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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