बड़ा नहीं छोटा बनकर जीएंगे तो खुशियां सदा हमारे घर में वास करेंगी
भीलवाड़ा। दुनिया में अभागा वह नहीं होता जिसके पास दौलत या संपदा नहीं होती बल्कि सबसे बड़ा अभागा वह होता जिस पर परमात्मा की कृपा नहीं होती है। जिनकी जुबान पर प्रभु का नाम नहीं आता उसका जीवन बेकार होता है। परमात्मा की कृपा पानी है तो छोटा बन जाओ दुनिया में सब प्राप्त हो जाएगा। आज से बड़ा नहीं छोटा बनकर जीने का प्रयास करें जीवन का आनंद प्राप्त हो जाएगा। छोटा बनने की कोशिश करों जिंदगी तुम्हें बड़ा बना देंगी।
ये विचार भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में शनिवार को प्रवचन में जीवन में अहंकार त्याग छोटा बनने से मिलने वाले लाभों पर चर्चा करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि बड़ा बनकर खारा होने से अच्छा है छोटा बनकर मीठे रहो। व्यक्ति दौलत,शोहरत, यश, बुद्धि से बड़ा नहीं होता बल्कि जो छोटा बन परमात्मा व गुरू के चरणों में पड़ा रहे वह बड़ा होता है। खुद को बड़ा नहीं छोटा मानेंगे तो सुखी रहेंगे। जो अपने अहंकार को गुरू से तुड़वा लिया करते है वह दुनिया में सबसे बड़े हो जाते है। परिवार में बड़ा नहीं छोटा बनकर जीएंगे तो खुशियां सदा घर में वास करेंगी। जो अकड़ेगा वह मिट जाएगा ओर जो झुकता जाएगा वह उपर उठता जाएगा। अकड़ कर नहीं झुककर जीना सीखे।
आचार्यश्री ने कहा कि कोई दिमाग से महान नहीं होता विनम्रता का गुण रखते हुए बेहतर इंसान बन जाओ दिमाग अपने आप महान हो जाएगा। जो खुद को सबसे अच्छा बताता है वहीं सबसे बुरा होता है। बड़ो के चरण स्पर्श कर हम उनका नहीं अपना सम्मान बढ़ाते है। हमारे अहंकार की अकड़ छोटी हो जाए तो जिंदगी जीने लायक हो जाएगी।
याद रखे सोने की पायल लाखों रूपए की होती फिर भी पैर में रहती जबकि बिन्दी चंद रूपए की होकर भी माथे पर रहती है। काटने का काम करने वाली कैंची पैर में ओर जोड़ने का काम करने वाली सुई टोपी में रहती है। जो काम तलवार से नहीं होते वह सुई कर लेती है। आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि आपके उपर किसी का राई बराबर भी उपकार हो तो उसे मरते दम तक याद रखना ओर किसी पर पहाड़ जैसा भी उपकार किया है तो उसे भूल जाए।
तकदीर इतनी बुलंद बनाओं की भगवान खुद पूछे तुझे क्या चाहिए
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि विरले होते है वह जिन्हें परमात्मा व गुरू की कृपा प्राप्त होती है। जीवन में परमात्मा व गुरू की सेवा कभी निष्फल नहीं होती है। गुरू व परमात्मा देते हुए दिखते नहीं पर इतना देते है कि जिसे मिलता उनकी झोलियां कभी खुशियों से खाली नहीं होती। जो भी परमात्मा व गुरू के सामने छोटा बनकर रहा उसके जीवन का उद्धार हो गया।
मंदिरों में भगवान के सामने मांगने की झोली मत फैलाओं बल्कि अपनी तकदीर को भक्त हनुमान की तरह इतना बुलन्द बनाओं की भगवान खुद पूछे कि बता तुझे क्या चाहिए। हनुमान से बड़ा भक्त शिरोमणी इस दुनिया में कोई नहीं है। उन्होंने राम के दोनों चरण पकड़ कर उन्हें मांग लिया। दौलत वालों का अधिकार घर पर होता है पर चरणों पर अधिकार केवल भक्तों व शिष्यों का होता है।
जीवन में जो भी मिला वह बिना मांगे मिला
आचार्य पुलकसागर महाराज ने अपने गुरू पूज्य आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज से जुड़े प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि संयम जीवन के इन 32 सालों में गुरूदेव से जो भी मिला वह बिना मांगे मिला है। मुझे किसी का गुरू नहीं बनना मुझे जिंदगी भर शिष्य बनकर रहना था पर गुरूदेव ने मुझे आचार्य बना दिया।
बड़े व गुरू हमसे पूछे कि तुझे क्या चाहिए तो आपका जीवन सार्थक हो जाएगा। कोई बोलों मांगो तो मांग मत लेना आपकी डिमांड छोटी ओर देने वाले की कृपा बहुत बड़ी होती है। हमे तो मांगना भी ठीक से नहीं आता परमात्मा से मांगने का अवसर आए तो उससे रूपए पैसे जैसी तुच्छ मांग नहीं कर परमात्मा को ही मांग ले सब कुछ मिल जाएगा।
भूत तो बनना ही है पद से दूर रहे
आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में कोई पद सदा नहीं रहता एक दिन भूत बनना ही पड़ता है। पद के साथ उसका जुड़वा भाई मद भी आता है। जिसे पद का मद हो जाता है वह खुद को बड़ा समझने लगता है पर उसे याद रखना चाहिए कि कोई पद या व्यक्ति हमेशा नहीं रहता। इस धरती पर स्थाई निवास किसी का नहीं है। राम, कृष्ण, महावीर जैसे महापुरूष भी आए ओर चले गए। संत महात्मा दुनिया छोड़कर जा सकते पर भक्तों के ह्दय में उनका निवास सदा रहता है। हनुमान के ह्दय में राम सीता के दर्शन होते है।
इस टीम के बिना भीलवाड़ा चातुर्मास नहीं होता
आचार्य पुलकसागर महाराज ने भीलवाड़ा में गतिमान एतिहासिक चातुर्मास की चर्चा करते हुए कहा कि सोचा नहीं था कि कभी भीलवाड़ा में चातुर्मास होगा। प्रवीण चौधरी, जयकुमार पाटनी, मनीष शाह आदि की टीम नहीं होती तो भीलवाड़ा चातुर्मास नहीं होता। इस टीम ने समर्पित भाव से अथक मेहनत कर आपसे मिलने का अवसर प्रदान किया।
प्रवचन से पूर्व दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं मंगलाचरण
प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन एवं आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य प्रेमदेवी, प्रदीप मनोज वैद परिवार ने प्राप्त किया। सौभाग्यशाली परिवार एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने किया। श्राविका तन्वी जैन ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया।
ज्ञान की गंगा में डूबकी लगाने के लिए भीलवाड़ा के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग पहुंच रहे है। ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन होंगे। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है जिसमें भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे है।
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