बेटियों को संस्कारवान नहीं बना पाए तो उनका ओर हमारा जीवन नरक बन जाएगा
भीलवाड़ा। जीवन में रिश्तेदारी से भी अनमोल दोस्ती होती है। रिश्ते तो खून से बनते है पर दोस्ती भावनाएं मिलने से बनती है। दोस्त उन परिन्दों की तरह नहीं होते जो तालाब सूखने पर उड़ जाए बल्कि उन मछलियों की तरह होते है जो तालाब सूखने पर वहीं प्राण त्याग देती है। जो संकट में भी साथ नहीं छोड़े वहीं दोस्त होता है। जिंदगी में दौलत या शोहरत कमाई तो कुछ नहीं कमाया जिसने दोस्ती कमाई उसने दुनिया में सब कुछ कमा लिया। एक अच्छा व सच्चा दोस्त जिंदगी को स्वर्ग बना देता है।
ये विचार भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में रविवार को प्रवचन में दोस्ती के महत्व पर चर्चा करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पत्नी खराब तो साठ प्रतिशत जीवन खराब, दोस्त अच्छा तो 80 प्रतिशत जीवन बच जाता है पर गुरू अच्छा हो तो शत प्रतिशत बच जाओंगे।
जीवन साथी गलत मिल गया तो एक भव बिगड़ जाएगा लेकिन दोस्तों की संगत गलत हो गई तो भव-भव बिगड़ जाएंगे। दोस्त अच्छे मिल जाए तो जीवन सुधर जाता है। मुसीबत में रिश्तेदारी से ज्यादा दोस्त काम आते है। जिंदगी खत्म हो जाएगी पर अच्छा वफादार दोस्त नहीं मिलेगा इसलिए खुद वफादार बन जाए। हम बईमानी करते ओर वफादार दोस्त ढूंढते है, ऐसा करने की बजाय अच्छा दोस्त बनने का प्रयास करो।
आचार्यश्री ने कहा कि दोस्त किसी को अपने अनुसार नहीं चलाते है वह जैसा है वैसा ही स्वीकार करते है। कोई किसी को बदल नहीं सकता इसलिए जैसे है उसी में आनंदित रहे। जैसे आप होंगे वैसे ही दोस्त मिलेंगे। आचार्य पुलकसागर महाराज ने बेटियों द्वारा घर से भाग कर विधर्मियों से शादी करने के बढ़ते मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि बेटियों को संस्कारवान बनाने के लिए मां-बाप ओर समाज सभी को जागृत होना पड़ेगा।
बेटियों को संस्कारवान नहीं बना पाए तो उनकी ओर परिवारजनों की जिंदगी नरक समान बन जाएगी। जो मां बेटियों को संस्कार नहीं सिखा पाएगी वह एक दिन विधर्मी की बन जाएगी। बेटियां हर किसी से दोस्ती नहीं करे। पढ़ाई करना उनका काम है ओर जीवनसाथी ढूंढना माता पिता का काम है। याद रखे ज्यादा भरोसा किया तो धोखा खाएंगे।
उन्होंने अफसोस जताया कि माता-पिता के कहने पर जो बेटियां मर्यादा वाले वस्त्र नहीं पहनती उन्हें किसी की मोहब्बत में आकर मुंह ढकने वाले कपड़े पहनने में शर्म नहीं आती। सनातनियों ओर जैनियों को जागरूक होकर अपना धर्म बचाने की जरूरत है। किसी को दोष नहीं देना है हमे खुद को सुधरना ओर सचेत होना पड़ेगा।
आचार्यश्री ने कहा कि वह बेटियां सौभाग्यशाली है जिन्हें भारत में ओर वह भी जिनशासन में जन्म मिला उस पर गौरव की अनुभूति करे ओर अर्न्तजातीय विवाह से बचे। विवाह के लिए हमारे पुरखों ने जो परम्परा बनाई उसका पालन करे। कागजों में नहीं जिंदगी में अच्छे नम्बर लाओ जिंदगी महान बन जाएगी। उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि प्यार ओर मोहब्बत में आकर भागने से पहले अंजाम सोच ले। बाद में ये नहीं कहना पड़े कि काश बात मान ली होती तो जिंदगी आज नरक नहीं बनती। तुच्छे सुख के लिए अपने परिवार पर कालिख मत पोतो। याद रखे जो अपने माता-पिता का नहीं हो सका वह किसी का नहीं हो सकेगा।
रिश्तों को दोस्ती में बदल ले बोझ नहीं लगेंगे
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि हमे दोस्ते अच्छे लगते पर रिश्ते बोझ लगने लगते है। ऐसा नहीं हो इसके लिए जरूरी है कि हम रिश्तों को दोस्ती में बदलना सीख जाए। बेटा जब कंधे के बराबर आ जाए तो पिता उससे दोस्त जैसा व्यवहार करने लगे। सास-बहु एक दूसरें के साथ मित्रता वाला सम्बन्ध रखे। पति-पत्नी दोस्ती का रिश्ता बना ले जिंदगी का आनंद आ जाएगा। बच्चों के साथ दोस्ती का रिश्ता बना लेंगे तो हम उनके मन की बात भी समझ जाएंगे।
उन्होंने कहा कि परिवार में रिश्ते बचे है पर उनमें प्रेम नहीं बचा है। दोस्ती में स्वतंत्रता ओर रिश्ते में पराधीनता होती है। दोस्ती में सकुन होता है जबकि रिश्ते निभाने पड़ते है। रिश्तेदारी में जाति धर्म देखा जाता है जबकि दोस्ती की कोई सीमा नहीं होती।
बेटी के लिए वर देखे तो सबसे पहले उसकी संगति देखे
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि बेटी के लिए वर देखने जाए तो परिवार, संपति, रिश्तेदार सब बाद में देखना सबसे पहले ये देखे कि उसके दोस्त कैसे है। बच्चे वैसे नहीं होते जैसे उनके माता-पिता होते है बच्चे वैसे हो जाते है जैसे उनके दोस्त ओर संगत हो जाती है। दोस्ती ही भविष्य तय करती है। बच्चे मां-बाप से मन की बात छिपाते है पर दोस्त हमराज हो जाते है।
अच्छी पत्नी लाने में परिवार का हाथ होता है, अच्छी संतान कुदरत की देन होती है पर दोस्त का चयन हम खुद करते है उसमें किसी अन्य का हाथ नहीं होता है। उन्होंने कहा कि याद रखे जब तब दोस्ती का रिश्ता है तभी तक दुनिया जीने लायक है जिस दिन ये रिश्ता भी नहीं होगा उस दिन संसार उजड़ जाएगा।
प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन एवं आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य जयकुमार, निर्मल सौरभ अक्षत विधान पाटनी परिवार ने प्राप्त किया। भोपाल से पधारे संघपति प्रदीप मामा ने भी गुरूदेव का अभिनंदन किया। अजमेर, चित्तौड़गढ़ आदि स्थानों से भी समाजजन गुरू दर्शन एवं ज्ञान गंगा महोत्सव का लाभ पाने के लिए पहुंचे।
सौभाग्यशाली परिवार एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने किया। जैन महिला मण्डल चन्द्रशेखर आजादनग ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया।
रविवार को अवकाश का दिन होने से भीलवाड़ा शहर एवं आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग ज्ञान की गंगा में डूबकी लगाने के लिए चित्रकूटधाम पहुंचे थे। ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन होंगे। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है जिसमें भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे है।
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