राज्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र भेजकर भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों का हवाला दिया
जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य एवं अन्य शिक्षकों को आगामी चुनाव में पीठासीन अधिकारी (PRO) के रूप में नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया के बीच उन्हें चुनाव ड्यूटी से मुक्त रखने की मांग उठी है। राजस्थान विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. डेजी शर्मा ने राज्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र भेजकर विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों को नियमित शैक्षणिक कार्य प्रभावित होने से बचाने के लिए चुनाव ड्यूटी से मुक्त रखने का आग्रह किया है।
पत्र में कहा गया है कि विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य सहित अन्य शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी के रूप में नियुक्त किए जाने की स्थिति सामने आ रही है। वर्तमान में विश्वविद्यालय एवं उसके संघटक महाविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप नई शैक्षणिक व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। सेमेस्टर प्रणाली के तहत नियमित कक्षाएं, पाठ्यक्रम पूरा कराने की गतिविधियां, आंतरिक मूल्यांकन, प्रायोगिक कार्य तथा विभिन्न परीक्षाओं से संबंधित शैक्षणिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में शिक्षकों को चुनाव कार्य में प्रतिनियुक्त किए जाने से नियमित अध्यापन कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
भारत निर्वाचन आयोग के 2023 के निर्देशों का हवाला
पत्र में भारत निर्वाचन आयोग के 7 जून 2023 के पत्र संख्या 464/INST/EPS/2023 (Election Official) का हवाला देते हुए कहा गया है कि चुनाव ड्यूटी के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों की नियुक्ति करते समय उनके पद, वेतनमान, वरिष्ठता एवं अन्य निर्धारित मानकों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। आयोग ने चुनाव कार्य के लिए आवश्यक न्यूनतम संख्या में ही कार्मिक लेने और संबंधित संस्थानों की नियमित गतिविधियों को प्रभावित नहीं करने की भावना भी स्पष्ट की थी।
पत्र में आयोग के निर्देशों के पैरा 6 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि चुनाव ड्यूटी आवंटित करते समय अधिकारी की वरिष्ठता, पद, रैंक एवं वर्तमान वेतनमान को ध्यान में रखा जाना चाहिए। साथ ही पीठासीन अधिकारी का स्तर उसके समूह के अन्य मतदान अधिकारियों की तुलना में उच्च रखने की बात कही गई है।
पूर्व चुनावों के निर्देशों का भी उल्लेख
आवेदन में राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा विधानसभा आम चुनाव 2023 के दौरान जारी पत्र क्रमांक F8(2)(6) निर्वाचन/2023/04, दिनांक 13 अक्टूबर 2023 का भी उल्लेख किया गया है। पत्र के अनुसार पूर्व में कॉलेजों के प्रोफेसरों को चुनाव में सेक्टर अधिकारी एवं नियुक्त प्रोफेसरों को पूर्व के चुनावों में सेक्टर मजिस्ट्रेट के रूप में छूट दी जाती रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय और महाविद्यालय के शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी निर्धारित करते समय उनके उच्च शैक्षणिक पद एवं संबंधित स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
NEP-2020 के क्रियान्वयन का दिया तर्क
डॉ. शर्मा ने पत्र में कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में नियमित कक्षाओं, सेमेस्टर प्रणाली, प्रायोगिक कार्य, मूल्यांकन एवं परीक्षाओं से जुड़े शिक्षकों को अनावश्यक रूप से चुनाव कार्य में प्रतिनियुक्त नहीं किया जाना चाहिए। इससे विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियां और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है।
उन्होंने राज्य निर्वाचन आयुक्त से भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य एवं अन्य शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी की ड्यूटी से यथासंभव मुक्त रखने तथा नियमित शैक्षणिक कार्य प्रभावित नहीं होने देने का अनुरोध किया है।
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