डॉक्टर, इंजीनियर बनो ना बनो पर अच्छे इंसान जरूर बन जाना, चित्रकूटधाम में ज्ञान गंगा महोत्सव में आचार्य पुलकसागर ने विद्यार्थियों को दिया प्रेरणादायी उद्बोधन
भीलवाड़ा। जिंदगी में डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, अधिकारी आदि कुछ भी बन सको या नहीं बन सको पर एक सच्चा देशभक्त व अच्छा इंसान जरूर बनना। कुछ भी बन गए पर इंसानियत के गुण नहीं आए तो सब बेकार हो जाएगा। अक्षर की पढ़ाई से जिंदगी महान नहीं बनती जिंदगी की पढ़ाई में अव्वल आने का लक्ष्य रखो। जिंदगी कागजों में नहीं इंसानियत में अच्छे नम्बर लाने का नाम है। जिंदगी हकीकत में पढ़ाई नहीं इंसानियत व मानवीयता होती है। बच्चें अपने शिक्षकों का सम्मान करे ओर शिक्षक बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ जिंदगी का ज्ञान भी प्रदान करे।
ये विचार भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में मंगलवार को विद्यार्थी जीवन पर केन्द्रित प्रवचन में व्यक्त किए। इस दौरान भीलवाड़ा के विभिन्न स्कूलों प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक के हजारों बच्चें वहां मौजूद थे।
आचार्यश्री ने प्रवचन के अंत में बच्चों से हाथ खड़े करवा संकल्प कराया कि वह कैसी भी परिस्थिति आ जाए कभी आतंकवादी व देशद्रोही नहीं बनेगे ओर राष्ट्र से गद्दारी नहीं करेंगे। हमारे जीवन में कितनी भी असफलताएं आ जाए पर कभी आत्महत्या नहीं करेंगे ओर मरते दम तक अपने माता-पिता का सम्मान करेंगे।
उन्होंने कहा कि जिंदगी बड़ी अनमोल होती है, परीक्षा में कभी नंबर कम भी आए तो तनाव में आकर निराश ओर हताश नहीं होना है। एक असफलता हजाार सफलता के द्वार खोलती है। कभी भी फांसी का फंदा लगा, जहर खाकर या पहाड़ से कूद कर जान मत दो ये जिंदगी दुबारा नहीं मिलने वाली है। आत्महत्या के अंधे कुएं में कभी छलांग नहीं लगाए क्योंकि फांसी पर बच्चा अकेला नहीं लटकता पूरे परिवार की खुशियों को फंदा लग जाता है।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि व्यक्ति की वेल्यू डिग्री से नहीं गुणों से होती है। जिंदगी में बीता हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता इसलिए पढ़ाई के जो 10-12 साल मिले है अच्छा पढ़ लिया तो जिंदगी भर मौजमस्ती कर सकेंगे ओर ये पढ़ाई का वक्त मौजमस्ती में गंवा दिया तो फिर पूरी जिंदगी परेशानियों में ही बीत जाएगी। उन्होंने माता पिता का सदा सम्मान करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि गई हुई दौलत, शोहरत वापस आ सकती है पर माता पिता चले गए तो कभी लौटकर वापस नहीं आएंगे।
व्यक्ति जन्म से नहीं कर्म से महात्मा व महापुरूष बनता
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि इस धरती पर कोई महापुरूष के रूप में पैदा नहीं हुआ। महावीर, गौतम बुद्ध, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी ये नाम इनके जन्म से नहीं थे इनको दुनिया शुरू में वर्धमान, सिद्धार्थ, नरेन्द्र ओर मोहनदास के नाम से जानती थी। ये साधारण इंसान के रूप में जन्मे थे इनको अपने कार्यो से महापुरूष व महात्मा का दर्जा प्राप्त हुआ। इंसान को जन्म से नहीं कर्म से महान बनना पड़ता है। महापुरूषों जैसे कार्य शुरू कर दो तुम्हारा नाम भी उस सूची में आ जाएगा।
आचार्यश्री ने विद्यार्थियों को प्रेरणा देते हुए कहा कि अपनी जिंदगी यूं ही पूरी नहीं कर लेना, अपने जीवन में कुछ ऐसे काम कर लेना कि दुनिया तुम्हे जानने लगे। जीवन में उपर उठने के लिए रंग रूप की नहीं हौंसलों की जरूरत पड़ती है। गरीबी को कभी अपनी कमजोरी या बाधा नहीं माने। मिसाइल मेन एपीजे अब्दुल कलाम ओर हमारी वर्तमान राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु कोई अमीर घर में नहीं जन्मे थे लेकिन उन्होंने अपने संकल्प व हौंसलों से उंचाईयों को हासिल किया।
दुनिया नाम से नहीं काम से जानती है
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि दुनिया में कई लोग जन्म लेकर चले जाते है लेकिन उन्हें अधिकतर लोग नहीं जानते वहीं कुछ लोग ऐसा काम करते है कि उन्हें दुनिया जाने के बाद भी याद करती है। कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स, इंदिरा गांधी को दुनिया उनके काम से जानने लगी। दुनिया राम ओर रावण, कृष्ण ओर कंस अच्छे ओर बुरे दोनों कार्य करने वालों को जानती है पर अच्छे कार्य करने वालों के मंदिर बनाए जाते है ओर बुरे कार्य करने वालों के पुतले जलाए जाते है। गुमनाम जिंदगी मत जीना ऐसे अच्छे कार्य करना कि इतिहास आपको याद करे ओर लोग मंदिर बनाए।
आचार्यश्री ने कहा कि जीवन डिग्रियों से नहीं गुणों से महान बनता है। कबीर,रैदास, मीरा किसी स्कूल में नहीं गए पर उन महापुरूषों पर पढ़ लिखे लोग पीएचडी करते है। आचार्यश्री ने प्रवचन के दौरान विद्यार्थियों से संवाद भी किया ओर उनके मन की बात जानी। कई बार मार्मिक प्रसंग आने पर विद्यार्थी भावुक भी दिखे।
प्रवचन से पूर्व दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं मंगलाचरण
प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन एवं आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य निहालचंदजी,ललित, पवन, लोकेश अजमेरा परिवार ने प्राप्त किया। विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों ने भी आचार्य श्री को श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सौभाग्यशाली परिवार एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह आदि पदाधिकारियों ने किया।
जैन ज्योति कॉलोनी महिला मण्डल की सदस्यों ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। संचालन चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह ने किया। भीलवाड़ा शहर एवं आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग ज्ञान की गंगा में डूबकी लगाने के लिए चित्रकूटधाम पहुंचे थे।
ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन गतिमान है। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है जिसमें भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे है।
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