जयपुर। राजस्थान के बांसवाड़ा नगर परिषद के पूर्व सभापति जैनेंद्र त्रिवेदी और पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष चांदमल जैन ने सोमवार को पुनः कांग्रेस का दामन थाम लिया। दोनों वरिष्ठ नेताओं ने जयपुर स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात की, जिसके बाद डोटासरा ने उन्हें पारंपरिक कांग्रेस का दुपट्टा पहनाकर विधिवत पार्टी में शामिल किया। राजनीतिक हलकों में दोनों नेताओं की इस 'घर वापसी' को आगामी नगर निकाय चुनावों के मद्देनजर बांसवाड़ा में पार्टी को प्रशासनिक व संगठनात्मक रूप से मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
महेंद्रजीत सिंह मालवीय के भाजपा में जाने पर दिया था इस्तीफा
उल्लेखनीय है कि गत लोकसभा चुनाव से पूर्व जब कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामा था, तब उनके करीबी माने जाने वाले चांदमल जैन, जैनेंद्र त्रिवेदी और नटवर तेली ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था। इस अवधि के दौरान दोनों नेताओं ने किसी अन्य राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण नहीं की थी। अब निकाय चुनावों से ठीक पहले उनकी वापसी को कांग्रेस की महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।
वापसी के साथ ही त्रिवेदी को मिली महत्वपूर्ण चुनावी जिम्मेदारी
पार्टी में शामिल होते ही पूर्व सभापति जैनेंद्र त्रिवेदी को बांसवाड़ा नगर परिषद चुनावों के संबंध में बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। कांग्रेस के जिला संगठन महासचिव मनीष एन. त्रिवेदी के अनुसार, जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह बामनिया के निर्देशानुसार जैनेंद्र त्रिवेदी को नगर परिषद बांसवाड़ा के वार्ड संख्या 1 से 9 तक के पूरे चुनावी प्रबंधन और प्रचार-प्रसार का प्रभारी बनाया गया है। उन्हें इन वार्डों में पार्टी की नीतियों का प्रचार करने और संगठन को धरातल पर मजबूत करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
पूर्व लोकसभा प्रत्याशी अरविंद डामोर का टिकट काटा
दूसरी ओर, निकाय चुनावों के प्रत्याशी चयन में कांग्रेस ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया है। पार्टी ने पिछले लोकसभा चुनाव में बांसवाड़ा से उम्मीदवार रहे अरविंद डामोर को इस बार नगर परिषद चुनाव में टिकट नहीं दिया है। बांसवाड़ा नगर परिषद सभापति का पद अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित होने के कारण डामोर को टिकट की दौड़ में सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन ऐन वक्त पर पार्टी नेतृत्व ने उनका पत्ता काट दिया है।


