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    अपराधी होने का कलंक मिटा: अलवर में घुमंतू समुदायों ने मनाया विमुक्त दिवस

    विमुक्त दिवस पर 90 से अधिक लोगों ने साझा किए अनुभव, संस्कृति और पहचान बचाने का लिया संकल्प

    अलवर। विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों ने अपने इतिहास, पहचान, संस्कृति और वर्तमान चुनौतियों पर संवाद करते हुए अलवर में विमुक्त दिवस मनाया। वर्ल्ड कॉमिक्स इंडिया की ओर से आयोजित कार्यक्रम में नट, बंजारा, गाड़िया लोहार, राजनट, सपेरा, बावरिया, छारा और रेबारी समुदायों के 90 से अधिक लोगों ने भाग लिया।

    कार्यक्रम में समुदायों के बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं और बालिकाओं ने शिक्षा, आजीविका, सामाजिक भेदभाव, बुनियादी सुविधाओं, पहचान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपने अनुभव साझा किए।

    1871 के कानून ने लगाया था अपराधी होने का कलंक

    विमुक्त दिवस उन समुदायों के सम्मान और अधिकारों की याद दिलाता है, जिन्हें ब्रिटिश शासन के दौरान वर्ष 1871 के क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के तहत जन्मजात अपराधी के रूप में चिन्हित कर निगरानी और नियंत्रण के दायरे में रखा गया था। स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1952 में इस कानून को समाप्त कर इन समुदायों को ‘विमुक्त’ घोषित किया गया।

    हालांकि कानून समाप्त होने के बावजूद सामाजिक भेदभाव और अपराधी होने का कलंक लंबे समय तक इन समुदायों के जीवन को प्रभावित करता रहा। कार्यक्रम में इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

    भाषा और सांस्कृतिक पहचान बचाने का संकल्प

    सांस्कृतिक पहचान और भाषा के मुद्दे पर सपेरा समुदाय के रामकुंवर ने कहा कि विमुक्त समुदायों की अपनी भाषाएं हैं, जिन्हें नई पीढ़ी धीरे-धीरे छोड़ती जा रही है। उन्होंने अपनी भाषा और सांस्कृतिक पहचान को बच्चों तक पहुंचाने तथा उसे संरक्षित रखने का संकल्प व्यक्त किया।

    बंजारा समुदाय के युवा मुकेश बंजारा ने कहा कि नई पीढ़ी को समुदाय की वर्तमान समस्याओं के साथ-साथ अपने इतिहास, संस्कृति और पहचान से भी परिचित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी जड़ों को समझना और अपनी पहचान पर गर्व करना बेहद जरूरी है।

    वहीं गाड़िया लोहार समुदाय की युवा संजू ने महिलाओं की भागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि समुदाय की महिलाओं के पास जीवन और समाज से जुड़ी अनेक कहानियां हैं। अपनी बात रखने का अवसर मिलने से महिलाओं को यह विश्वास मिलता है कि उनकी आवाज भी बदलाव का माध्यम बन सकती है।

    ‘बर्थ 1871’ की स्क्रीनिंग रही प्रमुख आकर्षण

    कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण गुजरात से विशेष रूप से पहुंचे फिल्मकार एवं विमुक्त समुदायों के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रहे दक्षिण छारा की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘बर्थ 1871’ की स्क्रीनिंग रही।

    फिल्म में विमुक्त समुदायों के औपनिवेशिक इतिहास और वर्ष 1871 में लागू किए गए क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट की पृष्ठभूमि को प्रस्तुत किया गया। स्क्रीनिंग के बाद दक्षिण छारा ने समुदाय के सदस्यों के साथ संवाद किया।

    उन्होंने कहा कि कानून समाप्त होने के बाद भी अपराधी होने का सामाजिक कलंक और भेदभाव लंबे समय तक इन समुदायों का पीछा करता रहा। विमुक्त दिवस ऐतिहासिक अन्याय को याद करने के साथ समुदायों की पहचान, गरिमा और अधिकारों की आवाज को मजबूत करने का अवसर है।

    समुदाय खुद लिख रहे अपनी कहानियां

    वर्ल्ड कॉमिक्स इंडिया के संस्थापक शरद शर्मा ने कहा कि विमुक्त समुदायों की कहानी केवल संघर्षों तक सीमित नहीं है। इन समुदायों के पास समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और अनुभवों का बड़ा संसार है। संस्था का प्रयास है कि समुदाय स्वयं अपनी कहानी कहे, अपनी समस्याओं पर संवाद करे और बदलाव की प्रक्रिया में नेतृत्वकारी भूमिका निभाए।

    कार्यक्रम में ग्रासरूट कॉमिक्स के माध्यम से समुदायों द्वारा अपनी जीवन-कहानियों और स्थानीय समस्याओं को दर्ज करने के प्रयास भी साझा किए गए। समुदाय के लोगों द्वारा स्वयं बनाई जा रही कॉमिक्स संवाद का माध्यम बनने के साथ समस्याओं की पहचान और संभावित समाधानों पर सामूहिक विचार का जरिया बन रही हैं।

    15 से अधिक गांवों में युवा कर रहे नेतृत्व

    वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद मलिक ने संस्था द्वारा वर्षों से किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि अब 15 से अधिक गांवों में घुमंतू समुदायों के युवा स्वयं नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहे हैं।

    कार्यक्रम के दौरान विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों की परंपराओं, लोक ज्ञान, भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को संजोती प्रदर्शनी भी लगाई गई।

    सामाजिक चिंतक बी.एल. वर्मा ने कार्यक्रम के समापन पर कहा कि विमुक्त समुदाय केवल अपने अतीत के संघर्ष और कलंक की कहानी नहीं हैं, बल्कि अपनी पहचान, संस्कृति, सामूहिक शक्ति और प्रयासों के साथ बदलाव तथा बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    कार्यक्रम में जगजीत सिंह, चारु शर्मा, सेवक सिंह, राहु खान, आयुष सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता एवं समुदाय प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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