लखनऊ: उत्तर प्रदेश में नजूल भूमि पर अवैध रूप से कब्जा जमाने वालों पर लगाम कसने के साथ ही अब इस जमीन का उपयोग गरीब परिवारों के पुनर्वास और जनहित के विकास कार्यों में करने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश नजूल संपत्ति (लोक प्रयोजनार्थ प्रबंधन और उपयोग) विधेयक, 2024 से संबंधित प्रवर समिति की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई। मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को पूरे राज्य की नजूल संपत्तियों का सटीक और तथ्यात्मक ब्योरा संकलित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नजूल भूमि का सीधा फायदा समाज के निर्धन वर्गों को मिलना चाहिए। जिन स्थानों पर भूमि उपलब्ध है, वहाँ गरीबों के लिए पक्के मकान बनाए जाएं। उन्होंने अगली बैठक में संपूर्ण प्रदेश का जिलावार ब्योरा प्रस्तुत करने को कहा है, जो लगभग एक महीने बाद प्रस्तावित है। बैठक के दौरान प्रमुख सचिव आवास पी. गुरुप्रसाद ने राज्य की नजूल जमीनों की वर्तमान स्थिति, अदालती मामलों और संबंधित प्रकरणों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया।
प्रत्येक जिले का तथ्यात्मक डेटा पेश करने के निर्देश
आगामी बैठक में प्रत्येक जिले की कुल नजूल संपत्ति, अदालतों में लंबित विवादों, फ्रीहोल्ड की जा चुकी भूमियों, अवैध कब्जों और अन्य राजस्व अभिलेखों का विवरण पटल पर रखा जाएगा। समाजवादी पार्टी के एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने भी जिलावार सटीक आंकड़े प्रस्तुत करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि प्रामाणिक डेटा के बिना पारदर्शी नीति बनाना संभव नहीं है। दशकों से वैध रूप से रह रहे पट्टेदारों, गरीबों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करते हुए सरकारी संपत्ति की सुरक्षा तय की जानी चाहिए।
एमएलसी ध्रुव त्रिपाठी ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नजूल भूमि की व्यवस्था पुरानी परिपाटी से चली आ रही है। इसका उपयोग जनकल्याण में ही होना चाहिए, न कि भू-माफियाओं या उद्योगपतियों को अवैध कब्जे की छूट दी जाए। उन्होंने जानकारी दी कि कई अवैध आवंटन पहले ही रद्द किए जा चुके हैं। बैठक में पुराने पट्टेदारों के हक, निरस्त पट्टों, मुआवजा, बेदखली और पुनर्वास के साथ-साथ अफसरों के विवेकाधीन अधिकारों पर अंकुश लगाने और पारदर्शिता लाने पर विशेष बल दिया गया।
72 हजार एकड़ नजूल भूमि, बाजार मूल्य दो लाख करोड़ से अधिक
राजस्व एवं सरकारी अभिलेखों के अनुमानों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में करीब 72 हजार एकड़ नजूल भूमि मौजूद है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत दो लाख करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। अकेले प्रयागराज में लगभग 71 लाख वर्गमीटर नजूल जमीन चिन्हित की गई है। इसके अलावा लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, सुल्तानपुर, गोंडा, वाराणसी, आगरा और बाराबंकी में भी बड़े पैमाने पर ऐसी कीमती जमीनों का दायरा फैला हुआ है।
प्रस्तावित नए नियमों के तहत अब किसी भी निजी व्यक्ति या निजी संस्था के पक्ष में नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड करने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। पट्टे (लीज) की मियाद समाप्त होते ही जमीन स्वतः राज्य सरकार के अधीन आ जाएगी, जिसका उपयोग स्कूल, अस्पताल, पार्क, मेट्रो परियोजनाओं और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे लोक कल्याणकारी कार्यों के लिए किया जाएगा। वर्तमान में सभी जिलों में पुराने अभिलेखों को खंगालकर नजूल भूमि का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।


