गांधीनगर। गुजरात सरकार ने राज्य में आपदा प्रबंधन, चिकित्सीय आपातकाल, राहत एवं बचाव कार्यों तथा अतिविशिष्ट व्यक्तियों (वीआईपी) के दौरों के दौरान हवाई संपर्क को निर्बाध बनाए रखने के लिए सभी हेलीपैड्स के नियमित रखरखाव को लेकर कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में सड़क एवं भवन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक परिपत्र के अनुसार, अब राज्य के प्रत्येक हेलीपैड की कार्यक्षमता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर तीन महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य स्थल निरीक्षण किया जाएगा।
त्रैमासिक निरीक्षण और तत्काल मरम्मत की व्यवस्था
विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के तहत, राज्य के सभी मौजूदा हेलीपैड्स को हर समय 'ऑपरेशनल कंडीशन' (उपयोग योग्य स्थिति) में रखना अनिवार्य होगा। प्रत्येक तिमाही में होने वाले निरीक्षण के दौरान यदि किसी हेलीपैड पर कोई तकनीकी खामी, टूट-फूट या मरम्मत की आवश्यकता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों को उसे बिना किसी विलंब के तत्काल प्रभाव से दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अभियंताओं को सौंपी गई सीधी जवाबदेही
हेलीपैड्स की सतत देखरेख और संचालन की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के कार्यपालक अभियंताओं (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर्स) को सौंपी गई है। निगरानी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए अधीक्षक अभियंता (सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर) भी अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले सभी हेलीपैड्स का समय-समय पर औचक निरीक्षण व समीक्षा करेंगे।
सतह, मार्किंग और ड्रेनेज की व्यापक निगरानी
दिशानिर्देशों के अनुसार, हेलीपैड की भौतिक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उसके पेवमेंट (सतह), पेंटेड मार्किंग, जलनिकासी (ड्रेनेज) प्रणाली और एप्रोच एरिया की नियमित रूप से मरम्मत की जाएगी, ताकि उड़ान और लैंडिंग के समय किसी प्रकार का जोखिम न रहे।
अतिक्रमण और बाधाओं पर सख्त पाबंदी
हेलीपैड परिसर और उसके आसपास के सुरक्षा दायरे को हर प्रकार के अवरोधों से मुक्त रखने के आदेश दिए गए हैं। इसके तहत अनाधिकृत निर्माण, निर्माण सामग्री के भंडारण, अवैध वाहन पार्किंग, कचरा, झाड़ियों तथा सरकारी विभागों द्वारा जब्त किए गए अनुपयोगी वाहनों को तत्काल हटाने के लिए नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। इस कदम से आपातकालीन परिस्थितियों में राहत कार्यों को गति मिलेगी और हवाई संचालन सुरक्षित रहेगा।


