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    पीएम मोदी के आपत्तिजनक कार्टून पर हाईकोर्ट की टिप्पणी, अभिनेत्री को अंतरिम राहत

    कोलकाता: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बंगाली अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आपत्तिजनक चित्रण वाले पोस्टर विवाद मामले में बड़ी राहत दी है। अदालत ने मामले में दर्ज प्राथमिकियों (FIR) के तहत उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। हालांकि, सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रदर्शित पोस्टर की प्रकृति पर गहरी हैरानी और असंतोष व्यक्त किया।

    क्या है पूरा मामला?

    बीते 24 जुलाई को कोलकाता के एस्प्लेनेड क्षेत्र में कथित नीट (NEET) परीक्षा प्रश्नपत्र लीक प्रकरण को लेकर एक छात्र विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन में शामिल अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा ने एक पोस्टर के साथ तस्वीर खिंचवाई थी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के अनुसार, उक्त पोस्टर में प्रधानमंत्री का आपत्तिजनक कार्टून चित्रित किया गया था। इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल के विभिन्न पुलिस थानों में अभिनेत्री के विरुद्ध कुल 16 प्राथमिकियां दर्ज की गईं।

    सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणियां

    मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने पोस्टर के स्वरूप पर कड़ा ऐतराज जताया:

    • अदालत की टिप्पणी: न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि कार्टून के स्वरूप को देखकर अदालत को गहरा धक्का लगा है। इसे 'अशोभनीय प्रस्तुति' करार देते हुए उन्होंने टिप्पणी की कि देश के किसी भी जिम्मेदार नागरिक को ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए था।

    • वकील का पक्ष: अभिनेत्री के अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने स्वीकार किया कि पोस्टर अशोभनीय था, लेकिन तर्क दिया कि इससे किसी आपराधिक धारा का उल्लंघन नहीं होता। उन्होंने सभी एफआईआर को एक साथ जोड़कर निरस्त करने की मांग की।

    अदालत के मुख्य निर्देश

    • सुरक्षात्मक आदेश: हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि 24 दिसंबर तक अदालत की अनुमति के बिना याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई दंडात्मक या कठोर कार्रवाई (जैसे गिरफ्तारी) नहीं की जाएगी, बशर्ते वे जांच में पूर्ण सहयोग प्रदान करें।

    • पूछताछ का नियम: यदि जांच अधिकारी अभिनेत्री को पूछताछ के लिए बुलाते हैं, तो उन्हें कम से कम 48 घंटे पूर्व नोटिस देना अनिवार्य होगा।

    • प्रोग्रेस रिपोर्ट: अदालत ने राज्य पुलिस को 14 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर मामले की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

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