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    ब्रह्मांड में नई खोज से हैरान वैज्ञानिक, सौरमंडल के बाहर मिला अनोखा ग्रह

    वाशिंगटन। सौरमंडल के बाहर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने एक बेहद अनोखे और दुर्लभ ग्रह की खोज की है, जिसने खगोल विज्ञान की दुनिया में नई हलचल पैदा कर दी है। पृथ्वी से लगभग 335 प्रकाश वर्ष दूर स्थित इस ग्रह का नाम ‘एचडी 176071 बी’ (HD 176071 b) रखा गया है। उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, इस ग्रह का एक बड़ा हिस्सा पानी से बना हो सकता है। आकार और संरचना के लिहाज से यह बेहद दिलचस्प है, लेकिन इसका भविष्य काफी खतरनाक माना जा रहा है। अपने तारे के अत्यधिक करीब होने के कारण यह धीरे-धीरे उसकी ओर खिंच रहा है और अंततः उसी में समाकर नष्ट हो सकता है।

    पृथ्वी से ढाई गुना बड़ा और अत्यधिक गर्म ‘जल ग्रह’

    वैज्ञानिकों के अनुसार एचडी 176071 बी आकार में पृथ्वी से करीब ढाई गुना बड़ा है, जबकि इसका द्रव्यमान (Mass) पृथ्वी की तुलना में लगभग साढ़े आठ गुना अधिक है। अनुमान लगाया गया है कि इस ग्रह का लगभग आधा हिस्सा पानी से जुड़ी संरचना से बना है। हालांकि, यहां का पानी पृथ्वी के शांत महासागरों जैसा नहीं है। अपने तारे के बेहद निकट होने के कारण इस ग्रह का तापमान बहुत अधिक है, जिससे इसकी सतह पर मौजूद जल अत्यधिक गर्म परिस्थितियों में रहता है। इसी वजह से खगोलविद इसे एक दुर्लभ 'गर्म जल ग्रह' (Hot Water World) के रूप में देख रहे हैं।

    महज 14 घंटे का एक साल और एक ही तरफ दिन

    यह ग्रह अपने तारे से केवल करीब 15 लाख मील की दूरी पर चक्कर लगा रहा है, जो पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी की तुलना में बेहद कम है।

    • 14 घंटे में एक वर्ष: तारे से नजदीकी के कारण इसका समय चक्र काफी अजीब है। यह ग्रह अपने तारे का एक चक्कर महज 14 घंटे में पूरा कर लेता है, यानी यहां एक वर्ष केवल 14 घंटे का होता है।

    • टाइडल लॉकिंग: इस ग्रह का एक हिस्सा लगातार अपने तारे की ओर (दिन) रहता है, जबकि दूसरा हिस्सा हमेशा अंतरिक्ष के अंधेरे (रात) की तरफ रहता है।

    तारे में समाकर खत्म होने की कगार पर अस्तित्व

    वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता तारे की शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण और ज्वारीय शक्तियां हैं, जो लगातार इस ग्रह को अपनी ओर खींच रही हैं। अनुमान है कि आने वाले समय में इसका होस्ट स्टार इसे पूरी तरह निगल जाएगा, जिससे इस ग्रह का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। हालांकि, इस प्रक्रिया का अध्ययन वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करेगा कि ग्रह अपने जीवनकाल के अंतिम चरण में किस तरह बदलते और नष्ट होते हैं। इसके अलावा, इसे 'नेप्च्यून डेजर्ट' (Neptune Desert) क्षेत्र का एक दुर्लभ उदाहरण माना जा रहा है। आमतौर पर तारों के इतने करीब नेप्च्यून के आकार के ग्रह नहीं पाए जाते, क्योंकि तेज विकिरण उनके वायुमंडल को नष्ट कर देता है। इसके बावजूद इसका वायुमंडल अब तक बचा रहना खगोलविदों के लिए एक बड़ी वैज्ञानिक खोज है।

     

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