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    खड़े हनुमान की प्रतिमा हटाने पहुंची नगर निगम की टीम, मौके पर भारी पुलिस बल तैनात 

    उज्जैन। आगामी सिंहस्थ 2028 की व्यापक तैयारियों के सिलसिले में उज्जैन शहर में बुनियादी ढांचे के विकास और निर्माण कार्यों का दौर तेजी से जारी है। इसी क्रम में चौड़ीकरण और विकास परियोजनाओं के आड़े आ रहे अतिक्रमणों को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई लगातार की जा रही है। इन निर्माण कार्यों के मार्ग में आ रहे धार्मिक स्थलों को भी पूरे सम्मान के साथ अन्यत्र स्थानांतरित किया जा रहा है। इसी प्रक्रिया के तहत शुक्रवार को उज्जैन नगर निगम की टीम ऐतिहासिक 'खड़े हनुमान मंदिर' से प्रतिमा को दूसरे स्थान पर स्थापित करने की कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची।

    विरोध के बाद पुलिस सुरक्षा में शुरू हुई स्थानांतरण प्रक्रिया

    नगर निगम की टीम इससे पहले 30 अगस्त को भी खड़े हनुमान मंदिर को हटाने की कार्रवाई के लिए पहुंची थी। उस समय विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं सहित स्थानीय लोगों के भारी विरोध, सड़क जाम और सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के प्रदर्शन के बाद प्रशासन को अपनी कार्रवाई बीच में ही रोकनी पड़ी थी।

    शुक्रवार को जैसे ही नगर निगम का अमला दोबारा मंदिर परिसर पहुंचा, वहां फिर से लोगों की भारी भीड़ जमा होने लगी। किसी भी संभावित अप्रिय स्थिति से निपटने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

    टंकी चौक पर स्थापित होगी प्रतिमा, 'हनुमान चौराहा' नाम रखने की मांग

    प्रशासनिक योजना के अनुसार खड़े हनुमान जी की इस पावन प्रतिमा को वर्तमान मंदिर स्थल से हटाकर शहर के 'टंकी चौक' पर पूरे धार्मिक विधि-विधान के साथ पुनः स्थापित किया जाएगा।

    इस बीच स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं ने नगर निगम एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रतिमा की स्थापना के पश्चात टंकी चौक का नाम बदलकर औपचारिक रूप से 'हनुमान चौराहा' कर दिया जाए। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से नाम बदलने की इस मांग पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

    विकास कार्यों के समर्थन में आगे आए स्थानीय व्यापारी और श्रद्धालु

    मंदिर स्थल में बदलाव से श्रद्धालुओं में भावुकता जरूर देखने को मिली, लेकिन शहर के व्यापक हित और सिंहस्थ के भव्य आयोजन को देखते हुए कई भक्तों ने प्रशासन की इस पहल का समर्थन किया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर हटने का दुख अवश्य है, लेकिन वे उज्जैन के विकास और आगामी धार्मिक महाकुंभ के आयोजन में अपना पूर्ण सहयोग देना चाहते हैं। क्षेत्र के व्यापारियों ने भी प्रशासनिक व्यवस्था और चौड़ीकरण के इस कार्य में अपना समर्थन व्यक्त किया है।

     

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