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    मौत के बाद भी दो जिंदगियों में भर गई रोशनी, 62 वर्षीय नेवन्दराम हरवानी का नेत्रदान बना मिसाल

    किशनगढ़ बास के व्यापारी ने दिल्ली एम्स में निधन के बाद नेत्रदान, परिवार ने कहा—इससे बड़ी श्रद्धांजलि और क्या होगी

    किशनगढ़ बास। इंसान दुनिया से जाने के बाद भी किसी की जिंदगी बदल सकता है, यह मिसाल किशनगढ़ बास के 62 वर्षीय व्यापारी नेवन्दराम हरवानी ने पेश की। दिल्ली स्थित एम्स में उपचार के दौरान उनके निधन के बाद परिवार ने उनकी आंखें दान कर दो अनजान लोगों के जीवन में रोशनी की उम्मीद जगाई।

    स्वर्गीय गोविंदराम हरवानी के पुत्र नेवन्दराम सात भाइयों में से एक थे। वे डेरा सच्चा सौदा से जुड़े समर्पित सेवादार बताए गए हैं। जीवनभर सेवा और मानवता के कार्यों से जुड़े रहे नेवन्दराम की सेवा भावना उनके निधन के बाद भी जारी रही।

    चुनावी व्यस्तता के बीच परिवार ने लिया बड़ा फैसला

    नेवन्दराम के निधन के समय परिवार में एक ओर नगर पालिका चुनाव की तैयारियां चल रही थीं, वहीं दूसरी ओर परिवार पर अपनों को खोने का गहरा दुख था। नेवन्दराम के भतीजे धर्मेंद्र हरवानी की पत्नी भाजपा के टिकट पर नगर पालिका चुनाव मैदान में हैं।

    घर में चुनावी रणनीति और जनसंपर्क का दौर चल रहा था, लेकिन इसी बीच परिवार ने दुख की घड़ी में भी मानवता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और नेत्रदान का निर्णय लिया।

    दो लोगों को दुनिया देखने का मिलेगा अवसर

    परिवार ने कहा कि नेवन्दराम की आंखें अब दो लोगों को दुनिया देखने का अवसर देंगी। उनके अनुसार, इससे बड़ी श्रद्धांजलि और क्या हो सकती है कि किसी अपने के जाने के बाद भी उसकी आंखों से किसी दूसरे व्यक्ति की जिंदगी रोशन हो।

    परिवार के इस निर्णय को समाज में मानवता और सेवा की प्रेरणादायक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

    दिल्ली एम्स की टीम ने प्राप्त की आंखें

    दिल्ली एम्स के नेत्र बैंक की डॉ. वर्णन के नेतृत्व में टीम ने नेवन्दराम की आंखें प्राप्त कीं। नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनका पार्थिव शरीर किशनगढ़ बास लाया गया।

    यहां बड़ी संख्या में परिजन, रिश्तेदार, गणमान्य नागरिक और साध-संगत के लोग मौजूद रहे। नम आंखों के बीच नेवन्दराम हरवानी का अंतिम संस्कार किया गया।

    नेवन्दराम हरवानी के परिवार ने अपने निर्णय से यह संदेश दिया कि जीवन की अंतिम घड़ी के बाद भी मानव सेवा का रास्ता खुला रहता है। उनका नेत्रदान समाज के लिए सेवा, संवेदना और मानवीय जिम्मेदारी की प्रेरणादायक मिसाल बन गया।

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