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    MP में फर्जी अफसरों का जाल! तृप्ति के बाद नकली IAS-IPS के कई मामले आए सामने

    भोपाल। लालबत्ती लगी गाड़ियां, फर्जी पहचान पत्र और सोशल मीडिया पर प्रशासनिक प्रभाव का दिखावा कर लोगों को ठगने वाले गिरोहों के खिलाफ मध्य प्रदेश पुलिस ने शिकंजा कसा है। राज्य के अलग-अलग जिलों से बीते कुछ महीनों में पांच ऐसे शातिर जालसाजों को बेनकाब किया गया है, जो खुद को आईएएस या आईपीएस अधिकारी बताकर सरकारी तंत्र और आम जनता की आंखों में धूल झोंक रहे थे। इन धोखेबाजों ने न केवल नौकरी दिलाने और ठेके दिलवाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी की, बल्कि सरकारी सर्किट हाउस, मंदिर के वीआईपी प्रोटोकॉल और लग्जरी सुविधाओं का भी जमकर दुरुपयोग किया।

    पर्यटन निगम की फर्जी एडिशनल डायरेक्टर बनकर वसूली

    फर्जीवाड़े का एक प्रमुख मामला तृप्ति सिंह राजपूत से जुड़ा है, जो खुद को आईएएस अधिकारी और मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम की एडिशनल डायरेक्टर बताती थी। वह भारत सरकार की नेमप्लेट लगी लग्जरी इनोवा गाड़ी से सफर करती थी ताकि लोग उसके रुतबे पर कोई संदेह न करें। सिवनी, बालाघाट और अशोकनगर में उसके खिलाफ नौकरी लगवाने के नाम पर लाखों रुपये ऐंठने की शिकायतें दर्ज हुईं। पुलिस की जांच में उसके पास से महंगे गैजेट्स, होटल और उड़ानों के बिल तथा जाली दस्तावेज बरामद किए गए, जिनका उपयोग वह लोगों को भ्रमित करने के लिए करती थी।

    चाय की दुकान से फर्जी ट्रेनी आईएएस तक का सफर

    ग्वालियर निवासी विकास गौतम दिल्ली के मुखर्जी नगर में एक कोचिंग के बाहर चाय की दुकान चलाता था। वहां सिविल सेवा अभ्यर्थियों को देखकर उसने प्रशासनिक सेवा की कार्यप्रणाली समझी और 2020 में यूपीएससी परिणाम आने के बाद खुद को चयनित बताकर 'विकास यादव आईएएस' नाम से सोशल मीडिया अकाउंट बना लिया। फॉलोअर्स की संख्या बढ़ने पर उसने इस आभासी छवि को हकीकत में भुनाना शुरू किया। उसने एक महिला चिकित्सक से नजदीकी बढ़ाकर मां की बीमारी का बहाना बनाया और 25 हजार रुपये ऐंठ लिए। जांच में सोशल मीडिया के जरिए 14 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी उजागर होने के बाद दिल्ली पुलिस ने उसे दबोच लिया।

    स्पेलिंग की गलती से पकड़ा गया फर्जी आईपीएस

    एमटेक पास ऋषि कुमार यादव ने नौकरी ढूंढने के बजाय सीधे 2016 बैच का आईपीएस अधिकारी और आयकर विभाग का सहायक जांच अधिकारी होने का ढोंग रचा। वह भोपाल के एमपी नगर में कोचिंग छात्रों को निशाना बनाता था और कैफे में बैठकें कर एक-एक लाख रुपये लेकर सरकारी नौकरी दिलाने का वादा करता था। उसने खुद के साथ अपनी पत्नी को भी आबकारी विभाग का अधिकारी बताया था। उसने पुराने पहचान पत्रों को संपादित कर जाली नियुक्ति पत्र तैयार किए, किंतु अंग्रेजी की गलत स्पेलिंग (वर्तनी) ने उसकी पूरी योजना बिगाड़ दी। छात्रों के शक के आधार पर एमपी नगर पुलिस ने उसे सलाखों के पीछे भेज दिया।

    किराए के फ्लैट में तैयार किया 'कलेक्टर कैंप कार्यालय'

    इंदौर में सामने आए एक अजीबोगरीब मामले में अहमदाबाद के हिमांशु पांचाल ने ओमेक्स सिटी स्थित किराए के मकान के बाहर 'आईएएस राज सोनी, जिला कलेक्टर' की नेमप्लेट टांग दी। मकान के भीतर आरजीबी लाइट्स और सीलिंग पर रुई से कृत्रिम बादल बनाकर उसने एक भव्य कैंप कार्यालय का रूप दे रखा था। 2,500 रुपये प्रतिदिन पर कार और ड्राइवर रखकर उसने उन्हें जल्द सरकारी नौकरी का भरोसा दिया। उसका यह नाटक तब खत्म हुआ जब बायपास स्थित एक होटल में उसने 16 हजार रुपये के बिल पर 'आईएएस राज सोनी' लिखकर पीए द्वारा भुगतान करने की बात कही। होटल प्रबंधन के संदेह जताने पर लसूडिया पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया।

    महाकाल भस्म आरती में वीआईपी पास की जिद पड़ी भारी

    उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में तड़के होने वाली भस्म आरती में बिना कतार दर्शन करने के लिए दिल्ली के अतुल कुमार ने खुद को नागरिक उड्डयन मंत्रालय का संयुक्त सचिव बताया। उसने सर्किट हाउस में वीआईपी कमरे की मांग की और मंदिर समिति पर विशेष प्रोटोकॉल के लिए दबाव बनाया। जब अधिकारियों ने पद संबंधी आधिकारिक प्रमाण मांगे तो वह टालमटोल करने लगा। मंदिर प्रशासन और पुलिस ने सीधे मंत्रालय से संपर्क कर पुष्टि की, जहां इस नाम का कोई अधिकारी कार्यरत नहीं मिला। इसके बाद महाकाल थाना पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।

    रुतबे की चमक के पीछे ठगी का खेल

    इन सभी मामलों में आरोपियों का तरीका अलग रहा हो, लेकिन रणनीति एक जैसी थी—संवैधानिक और उच्च पदों की धौंस दिखाकर सामने वाले का भरोसा जीतना और फिर आर्थिक लाभ उठाना। हालांकि, दस्तावेजों में वर्तनी की गलतियों, बिना भुगतान के रौब झाड़ने या अस्तित्वहीन पदों के दावों जैसी छोटी-छोटी खामियों ने ही इन जालसाजों का पर्दाफाश किया। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति की गाड़ी, वर्दी या सोशल मीडिया प्रोफाइल से प्रभावित होकर सरकारी नौकरी या अन्य सुविधाओं के नाम पर धन का लेन-देन न करें और किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत आधिकारिक सत्यापन कराएं।

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