देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं चिरूनी, संत दीपाई नाथ महाराज के सानिध्य में आध्यात्मिक वातावरण रहता है खास
सोडावास। सोडावास के समीप चिरूनी नहावणी नदी तट और चिरूनी बस स्टैंड के पास स्थित हनुमान मंदिर परिसर का गोरखनाथ धुणा आश्रम राठ क्षेत्र के साथ-साथ देश के कई राज्यों के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। आश्रम में राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा और मध्य प्रदेश तक से श्रद्धालु एवं संत-महात्मा पहुंचते हैं।
आश्रम के संत दीपाई नाथ महाराज के अनुसार बाबा गोरखनाथ का धुणा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। यहां आने वाले लोग धार्मिक वातावरण में कुछ समय बिताते हैं और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं। संत दीपाई नाथ महाराज स्वयं बाबा गोरखनाथ की आराधना करते हुए आश्रम की धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं।
संत दीपाई नाथ महाराज के अनुयायी कई राज्यों में
राठ क्षेत्र के संत दीपाई नाथ महाराज के प्रति महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों के श्रद्धालुओं में आस्था बताई जाती है। समय-समय पर इन क्षेत्रों से अनुयायी आश्रम पहुंचकर धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं और संतों का आशीर्वाद लेते हैं।
आश्रम परिसर में अलग-अलग संप्रदायों के साधु-संतों का भी आवागमन बना रहता है। साधु-संतों के ठहरने और सेवा के लिए यहां विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं। आश्रम प्रबंधन की ओर से दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं और आगंतुकों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाता है।
भजन मंडलियों के पहुंचने से बनता है भक्तिमय माहौल
चिरूनी के गोरखनाथ धुणा आश्रम में समय-समय पर दूर-दराज के क्षेत्रों से भजन मंडलियां भी पहुंचती हैं। भजन-कीर्तन के दौरान विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ शामिल होते हैं, जिससे आश्रम परिसर में भक्तिमय वातावरण बन जाता है।
संत दीपाई नाथ महाराज आश्रम में आध्यात्मिक शिक्षा, शांति और सेवा के साथ हरियाली को भी विशेष महत्व देते हैं। आश्रम परिसर का वातावरण श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति के करीब रहने का अवसर देता है।
साधु-संतों की सेवा और आगंतुकों की सुविधा पर जोर
आश्रम में आने वाले साधु-संतों के लिए ठहरने, सेवा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जाती है। इसके अलावा दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए भी व्यवस्थाएं की जाती हैं।
चिरूनी स्थित यह आश्रम राठ क्षेत्र की धार्मिक पहचान के साथ अब राजस्थान से बाहर रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का स्थल बनता जा रहा है। बाबा गोरखनाथ की आराधना, भजन-कीर्तन, साधु-संतों का आवागमन और शांत वातावरण इस स्थान को धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष बनाते हैं।
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