नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी अब गहरे समुद्र से लेकर अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक नई ऊंचाइयों को छू रही है। अमेरिकी दूतावास ने 'यूएस-इंडिया ट्रस्ट' (TRUST) पहल के तहत सबसी केबल नेटवर्क की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह इंफ्रास्ट्रक्चर वैश्विक डिजिटल कॉमर्स, क्लाउड सिस्टम और उभरती एआई अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। दोनों देश इस महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे को अधिक सुरक्षित, सुदृढ़ और विश्वसनीय बनाने के लिए मिलकर कदम उठा रहे हैं।
वैश्विक सबसी केबल हब बनने की राह पर भारत
अमेरिकी दूतावास के अनुसार, भारत की भौगोलिक अवस्थिति दुनिया के प्रमुख आर्थिक और व्यापारिक बाजारों को जोड़ती है। तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और क्लाउड-एआई की विशाल मांग भारत को एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सबसी केबल केंद्र के रूप में स्थापित करने का बेहतरीन अवसर प्रदान करती है। इस क्षेत्र में निरंतर निवेश न केवल देश की डिजिटल क्षमता का विस्तार करेगा, बल्कि वैश्विक डेटा प्रवाह और रणनीतिक संचार नेटवर्क में नई दिल्ली की धुरी को और अधिक सशक्त बनाएगा।
उभरती तकनीकों और 'पैक्स सिलिका' में रणनीतिक सहयोग
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार, TRUST पहल रक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में दोनों देशों के तालमेल को रफ्तार दे रही है। अमेरिका महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए केवल अपने भरोसेमंद साझेदारों को प्राथमिकता दे रहा है, जिसमें भारत अग्रणी स्थान पर है। उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व वाली 'पैक्स सिलिका' पहल में भारत की भूमिका को अहम बताया, जिसका मुख्य उद्देश्य संवेदनशील तकनीकों की सुरक्षित व विश्वसनीय सप्लाई-चेन तैयार करना है।
भारत को भरोसेमंद सहयोगी मानने का आधार
राजदूत ने स्पष्ट किया कि भारत पर अटूट विश्वास, यहां की प्रतिभा, सुदृढ़ तकनीकी क्षमता और नीतिगत स्थिरता के कारण ही वह अमेरिका के शीर्ष साझेदारों में शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वॉशिंगटन यात्रा के दौरान घोषित इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के सरकारी, अकादमिक और निजी क्षेत्रों के बीच समन्वय को गहरा करना है। इसके साथ ही संवेदनशील डेटा की सुरक्षा और केवल सत्यापित वेंडर्स के तकनीकी उपकरणों को बढ़ावा देने पर दोनों पक्ष एकमत हैं।
एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर के लिए बनेगा रोडमैप
पहल के अगले चरण में दोनों देश इस वर्ष के अंत तक एक संयुक्त एआई इंफ्रास्ट्रक्चर रोडमैप पेश करेंगे। इस योजना का फोकस भारत में अमेरिकी तकनीक आधारित बड़े एआई ढांचों के वित्तपोषण, निर्माण, ऊर्जा आपूर्ति और कनेक्टिविटी से जुड़ी चुनौतियों को दूर करना होगा। दोनों देश नेक्स्ट-जेनरेशन डेटा सेंटर्स में निजी निवेश बढ़ाने, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और प्रोसेसर की सुलभता सुनिश्चित करने तथा सामाजिक विकास के लिए एआई के नवाचारों पर संयुक्त रूप से कार्य करेंगे।


