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    अल्जाइमर का खतरा कैसे पहचानें? न्यूरोलॉजिस्ट ने बताए चाल और बातचीत से जुड़े लक्षण

    मस्तिष्क में होने वाले प्रारंभिक बदलाव केवल याददाश्त कमजोर होने तक ही सीमित नहीं रहते। विशेषज्ञों के अनुसार, व्यक्ति के चलने की शैली, बातचीत के तरीके और दैनिक कार्य निष्पादन में आए सूक्ष्म परिवर्तन भी न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य की ओर इशारा करते हैं। विश्व अल्जाइमर दिवस के अवसर पर वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नेहा पंडिता ने मस्तिष्क में होने वाले प्रारंभिक परिवर्तनों एवं उनके लक्षणों की विस्तृत जानकारी दी है।

    अल्जाइमर और मानसिक सतर्कता से जुड़े प्रमुख लक्षण

    • चाल-ढाल एवं शारीरिक संतुलन में परिवर्तन: मस्तिष्क शरीर के संतुलन और गतिविधियों को नियंत्रित करता है। यदि कोई व्यक्ति एकाएक छोटे कदम लेने लगे, धीमी गति से चले, मुड़ते समय हिचकिचाए अथवा बाधाओं के समीप असहज महसूस करे, तो इस पर ध्यान देना आवश्यक है। हालांकि, यह परिवर्तन गठिया, दृष्टि दोष या दवाओं के दुष्प्रभाव से भी हो सकता है।

    • संभाषण एवं विचार अभिव्यक्ति में कठिनाई: सामान्य शब्दों को स्मरण करने में बार-बार समस्या होना, वार्तालाप के मध्य मुख्य विषय भूल जाना, अस्पष्ट उत्तर देना अथवा सरल बातों को समझाने में असमर्थ होना मानसिक स्वास्थ्य में बदलाव का संकेत है।

    • दैनिक गतिविधियों में बार-बार त्रुटियां: नियमित दिनचर्या के कार्यों—जैसे चाय बनाना, बिलों का भुगतान, दूरभाष का उपयोग या वर्षों पुरानी विधियों से भोजन पकाने में अचानक त्रुटियां होना अथवा दूसरों पर निर्भरता बढ़ना ध्यान देने योग्य विषय है।

    • परिस्थितिजन्य निर्णय क्षमता में ह्रास: नए वातावरण में अनुकूलन की क्षमता प्रभावित होना, मार्ग बदलने पर अत्यधिक भ्रमित हो जाना या योजनाओं में बदलाव को संभालने में कठिनाई होना योजना निर्माण और निर्णय लेने की क्षमता में कमी को दर्शाता है।

    प्रत्येक बदलाव अल्जाइमर नहीं: चिकित्सकीय परीक्षण आवश्यक

    डॉ. नेहा पंडिता के अनुसार, इन लक्षणों के उभरने पर स्वतः ही अल्जाइमर का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। अवसाद, अनिद्रा, श्रवण दोष, पोषक तत्वों की कमी, दवाओं के प्रभाव अथवा स्ट्रोक जैसी स्थितियां भी सोचने-समझने और कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। अतः सही निदान हेतु संपूर्ण न्यूरोलॉजिकल जांच अनिवार्य है।

    परिजनों के लिए आवश्यक परामर्श

    परिजनों को मुख्य रूप से यह देखना चाहिए कि व्यक्ति के व्यवहार अथवा कार्यशैली में कोई नया और निरंतर बदलाव आ रहा है या नहीं। यदि चाल-ढाल, संभाषण, निर्णय क्षमता या दैनिक क्रियाकलापों में आए बदलाव से व्यक्ति की स्वायत्तता प्रभावित हो रही हो, तो समय रहते विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

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