ईसरदा-बांध से बंधबारेठा तक खुली नहर के बजाय पाइपलाइन या गंभीर नदी से पानी पहुंचाने की मांग, किसान बोले—जमीन नहीं देंगे
जयपुर। ग्राम कोडियाई में बुधवार को किसान महापंचायत का आयोजन किया गया। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट की अध्यक्षता में हुई सभा में ईसरदा बांध से लेकर बंधबारेठा, जिला भरतपुर तक पानी पहुंचाने की प्रस्तावित व्यवस्था सहित किसानों की जमीन और मुआवजे से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
महापंचायत में किसानों ने खुली नहर के स्थान पर पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचाने के विकल्प को अपनाने की मांग उठाई। बैठक में मौजूद किसानों ने इस विकल्प को कृषि भूमि को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। वहीं इससे भी बेहतर विकल्प के तौर पर ईसरदा बांध से गंभीर नदी के माध्यम से पानी पहुंचाने का सुझाव रखा गया।
डीएलसी को लेकर रामपाल जाट का सरकार पर निशाना
किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने जमीन के प्रतिकर और बाजार मूल्य से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रभावित किसानों को मिलने वाले प्रतिकर के लिए बाजार मूल्य को डीएलसी के आधार से परिभाषित करना किसानों के साथ धोखा है।
रामपाल जाट ने खुली नहर के निर्माण के लिए कृषि भूमि लिए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कृषि भूमि केवल जमीन का टुकड़ा नहीं होती, बल्कि उससे किसान परिवारों की आजीविका जुड़ी होती है। खुली नहर के निर्माण से कृषि भूमि प्रभावित होने पर किसान परिवारों के सामने विस्थापन और आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है।
पाइपलाइन और गंभीर नदी का विकल्प रखने की मांग
महापंचायत में किसानों ने सरकार से मांग की कि ईसरदा बांध से बंधबारेठा तक पानी पहुंचाने के लिए खुली नहर के बजाय पाइपलाइन के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जाए। सभा में गंभीर नदी के माध्यम से पानी पहुंचाने के विकल्प को भी सामने रखा गया।
किसानों का कहना था कि पानी पहुंचाने की योजना के साथ कृषि भूमि, किसान परिवारों की आजीविका और प्रभावित क्षेत्रों के हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देने की बनी योजना
महापंचायत में सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन उपखंड अधिकारी बौली के माध्यम से भेजने की योजना बनाई गई। तहसील बौली, बामनवास और गंगापुर क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे पांच पटेलों ने भी सभा को संबोधित किया और किसानों से जुड़े मुद्दों को सरकार तक पहुंचाने की बात कही।
बैठक में किसान महापंचायत की श्रृंखला आगे भी जारी रखने पर सहमति बनी। अगली किसान महापंचायत 27 सितंबर को सुंदरी गांव में आयोजित किए जाने की घोषणा की गई।
किसानों ने बुलंद किया नारा
सभा के दौरान किसानों ने अपनी जमीन को लेकर विरोध दर्ज कराते हुए जान दे देंगे, लेकिन खुली नहर के लिए जमीन नहीं देंगे का उद्घोष किया। इस दौरान किसानों ने सरकार से योजना पर पुनर्विचार करने और प्रभावित किसानों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग रखी।
महापंचायत का संचालन सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी बीरबल मीणा ने किया। सभा में बौली, बामनवास और गंगापुर तहसील क्षेत्र के किसानों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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