श्रावकों में शिविरार्थियों को भोजन के लिए घर ले जाने की लगी होड़, 17 सितंबर को होगी उत्तम मार्दव धर्म की पूजा
अलवर। दिगंबर जैन धर्मावलंबियों का दस दिवसीय दशलक्षण पर्व शुरू होते ही शहर में धार्मिक गतिविधियों के साथ सेवा और समर्पण का अनूठा वातावरण दिखाई देने लगा है। दशलक्षण पर्व के अवसर पर दिगंबर जैन समाज के लोगों की दिनचर्या व्रत, संयम और धार्मिक साधना के साथ शुरू हो गई है।
इसी क्रम में स्थानीय स्कीम नंबर 10 स्थित जैन भवन में दिगंबर जैन संत मुनि सौम्य सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में दस दिवसीय जीवन विकास शिविर भी शुरू हो गया है। शिविर के दौरान स्थानीय और बाहर से आए श्रावक शिविरार्थी के रूप में धार्मिक गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं।
घर-घर शिविरार्थी से गूंज रहा जैन भवन
जैन पत्रकार महासंघ अलवर जिला के संयोजक हरीश जैन ने बताया कि जीवन विकास शिविर की तैयारियां पिछले करीब एक माह से चल रही थीं। दशलक्षण पर्व शुरू होने के साथ ही इन तैयारियों का परिणाम जैन भवन में दिखाई देने लगा।
शिविरार्थियों को भोजन कराने के लिए जैन श्रावकों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में श्रावक शिविरार्थियों को अपने घर भोजन के लिए ले जाने की इच्छा जता रहे हैं। इसके चलते जैन भवन में घर-घर शिविरार्थी, हर घर शिविरार्थी का भाव दिखाई दे रहा है।
यह आयोजन जैन समाज में धार्मिक साधना के साथ अतिथि सत्कार, सेवा और पारिवारिक जुड़ाव की भावना को भी सामने ला रहा है।
बाहर से आए श्रावकों की भी सहभागिता
जीवन विकास शिविर में स्थानीय जैन समाज के साथ बाहर से आए श्रावक भी शिविरार्थी के रूप में भाग ले रहे हैं। दशलक्षण पर्व के दौरान ये शिविरार्थी विभिन्न जैन परिवारों के यहां भोजन के लिए जाएंगे।
हरीश जैन के अनुसार, जैन भवन में इस प्रकार का वातावरण बार-बार देखने को नहीं मिलता। वर्ष 2026 के दशलक्षण पर्व के दौरान यह विशेष दृश्य देखने को मिल रहा है, जहां श्रावकों में शिविरार्थियों की सेवा और उन्हें भोजन कराने को लेकर उत्साह बना हुआ है।
यह क्रम 16 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर तक प्रतिदिन सुबह करीब 10 बजे देखने को मिलेगा।
व्रत और संयम के साथ शुरू हुई दिनचर्या
दशलक्षण पर्व के प्रारंभ के साथ ही दिगंबर जैन धर्मावलंबियों ने अपनी दैनिक दिनचर्या में व्रत, संयम, पूजा-अर्चना और आत्मचिंतन को प्रमुखता दी है। पर्व के प्रत्येक दिन जैन धर्म के दस उत्तम धर्मों में से एक धर्म की आराधना और उसके जीवन में महत्व पर चिंतन किया जाता है।
17 सितंबर को उत्तम मार्दव धर्म की पूजा
दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन 17 सितंबर को उत्तम मार्दव धर्म की पूजा होगी। इस अवसर पर जैन मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन किए जाएंगे और श्रद्धालु उत्तम मार्दव धर्म के आध्यात्मिक महत्व को समझते हुए इसकी आराधना करेंगे।
जैन भवन में चल रहे जीवन विकास शिविर के माध्यम से भी श्रद्धालुओं को धार्मिक शिक्षा, आत्मसंयम और जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
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