भोपाल। मध्य प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों की विद्युत संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2027-28 के एआरआर (ARR) प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पूर्व उद्योगपतियों की व्यावहारिक आवश्यकताओं और सुझावों को समझना था। राजधानी के क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित इस सम्मेलन की अध्यक्षता कंपनी के प्रबंध संचालक विशेष गढ़पाले ने की।
इस बैठक में प्रदेश भर के विभिन्न औद्योगिक संगठनों से जुड़े लगभग 25 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उद्योगपतियों ने विद्युत दरों, आपूर्ति की गुणवत्ता और वर्तमान में आ रही व्यावहारिक चुनौतियों पर अपने विचार रखे। कंपनी अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि प्राप्त सुझावों पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी।
उद्योगों ने उठाई टैरिफ में राहत की मांग
सम्मेलन के दौरान औद्योगिक प्रतिनिधियों ने सबसे पहले निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति का विषय उठाया। उद्योगपतियों का तर्क था कि बिजली कटौती से उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे उद्योगों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ता है। इसके समाधान हेतु पुराने खुले तारों के स्थान पर कवर्ड कंडक्टर लगाने का सुझाव दिया गया ताकि तकनीकी व्यवधानों को कम किया जा सके।
बैठक में डिमांड चार्ज और एनर्जी चार्ज की दरों को कम करने की मांग भी प्रमुखता से उठी। प्रतिनिधियों ने कहा कि लाइन लॉस (AT&C हानियां) और बिजली चोरी पर प्रभावी रोक लगाकर प्रणाली की लागत घटाई जा सकती है, जिसका लाभ उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए। इसके अतिरिक्त न्यूनतम प्रभार (मिनिमम चार्ज) को समाप्त करने, एचटी श्रेणी में लोड फैक्टर आधारित ऊर्जा शुल्क लागू करने तथा kVAH आधारित बिलिंग प्रणाली में सुधार की अपेक्षा व्यक्त की गई।
बैठक में किन प्रमुख संगठनों ने हिस्सा लिया?
इस राज्यस्तरीय चर्चा में ऑल इंडिया स्टील मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन, फेडरेशन ऑफ एमपी चैंबर ऑफ कॉमर्स, गोविंदपुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज देवास, मध्य प्रदेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन, रतलाम औद्योगिक एसोसिएशन, एमपी स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज ऑर्गेनाइजेशन, लघु उद्योग भारती, महाकौशल उद्योग संघ तथा विंध्य चैंबर ऑफ कॉमर्स जैसे प्रतिष्ठित संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
नवनिर्मित औद्योगिक पार्कों में भूमिगत केबलिंग पर जोर
बैठक में भविष्य के औद्योगिक क्षेत्रों के विकास को लेकर भी दूरगामी सुझाव दिए गए। उद्योगपतियों ने नए औद्योगिक पार्कों में आरंभ से ही भूमिगत (अंडरग्राउंड) केबल नेटवर्क बिछाने की आवश्यकता जताई, जिससे मौसम या अन्य कारणों से होने वाली तकनीकी रुकावटों से बचा जा सके और विद्युत क्षति कम हो।
कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक (राजस्व प्रबंधन) शैलेंद्र सक्सेना ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से टैरिफ संरचना और ऊर्जा प्रबंधन के तकनीकी पहलुओं को रेखांकित किया। इसके साथ ही मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) के अधिकारियों ने राज्य में उद्योगों को दी जा रही विभिन्न रियायतों और प्रोत्साहन योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की।


