चुनाव प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों से गरमाया मामला, उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप और प्रशासन की भूमिका पर मांगा जवाब
खंडार। राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले की खंडार नगर पालिका में अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। रामपाल जाट ने आरोप लगाया है कि निर्वाचित पार्षद मानवेंद्र को मतदान के अधिकार से वंचित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर ऐसी परिस्थितियां पैदा की गईं, जिससे वह अध्यक्ष पद के चुनाव में अपना मत नहीं डाल सके। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और निर्वाचित प्रतिनिधि के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
रामपाल जाट के अनुसार मानवेंद्र अनुसूचित जाति वर्ग से निर्वाचित पार्षद हैं और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की ओर से पार्षद का चुनाव जीता था। उनके मुताबिक अध्यक्ष पद के लिए अपेक्षा के विपरीत किसी अन्य प्रत्याशी को आगे किए जाने के बाद मानवेंद्र को कथित रूप से नामांकन प्रक्रिया के लिए बाड़ाबंदी से बाहर नहीं आने दिया गया। इसके बाद मानवेंद्र के पिता हंसराज बैरवा ने 18 सितंबर को अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया।
परिजनों ने जताई चिंता, उच्च न्यायालय पहुंचे
दावे के अनुसार मानवेंद्र 14 सितंबर को मतदान के बाद से ही बाड़ाबंदी में था और परिजनों से उसका संपर्क नहीं हो पा रहा था। परिजनों ने पुलिस थाने से लेकर पुलिस अधीक्षक तक संपर्क कर उसके संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की। रामपाल जाट का कहना है कि परिवार की ओर से मानवेंद्र के जीवन और उसके मतदान के अधिकार को लेकर भी आशंका जताई गई।
मानवेंद्र की पत्नी महिमा की ओर से भी कथित तौर पर मदद की गुहार लगाई गई। इसके बाद मामला राजस्थान उच्च न्यायालय तक पहुंचा। रामपाल जाट के अनुसार बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए सरकार को एक सप्ताह में स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र न्यायिक या प्रशासनिक पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिली है। इसलिए इस मामले में न्यायालय के आदेश और उसके अनुपालन से संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों का सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
मतदान समाप्त होने के बाद पार्षद को थाने लाने का दावा
रामपाल जाट का आरोप है कि 21 सितंबर को अध्यक्ष पद के लिए मतदान पूरा होने के करीब दो घंटे बाद पुलिस मानवेंद्र को लेकर खंडार थाने पहुंची। उनका दावा है कि यदि मानवेंद्र को समय रहते मतदान केंद्र तक पहुंचाया जाता तो वह अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकता था।
उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि मतदान अवधि में मानवेंद्र को रोके रखना और मतदान समाप्त होने के बाद उसे थाने लाना पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, इस आरोप की पुष्टि के लिए पुलिस विभाग, निर्वाचन अधिकारी अथवा राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया आवश्यक है।
हंसराज बैरवा के नामांकन को लेकर भी आरोप
रामपाल जाट ने हंसराज बैरवा के नामांकन की प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि नामांकन जांच के दौरान निर्वाचन अधिकारी ने नामांकन निरस्त नहीं किया, जिसके बाद अध्यक्ष पद के मतदान से पहले निर्वाचन अधिकारी को बदल दिया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदान शुरू होने से पहले भाजपा के कुछ पार्षदों को मतदान केंद्र में प्रवेश दिया गया, जबकि अध्यक्ष पद के प्रत्याशी हंसराज बैरवा को कथित रूप से मतदान केंद्र के आसपास भी नहीं आने दिया गया। जाट के अनुसार बाद में उन्हें मतदान केंद्र में प्रवेश की अनुमति मिली।
रामपाल जाट ने दावा किया कि मतदान केंद्र पर हुई गतिविधियों की वीडियोग्राफी और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अभिलेखों की जांच से घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
13 पार्षदों के मतदान के समय पर उठाए सवाल
जाट के अनुसार 13 पार्षदों का मतदान निर्धारित समय शुरू होने के लगभग 10 मिनट बाद ही पूरा हो गया। उन्होंने निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत तैयार वीडियोग्राफी को जांच का आधार बनाए जाने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि मतदान केंद्र पर मौजूद सभी प्रत्याशियों और मतदाताओं के लिए समान परिस्थितियां थीं तो संबंधित अभिलेखों और वीडियोग्राफी से इसकी पुष्टि की जा सकती है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।
आम लोगों को भी परेशानी का आरोप
रामपाल जाट ने चुनाव के दौरान आम लोगों को हुई कथित परेशानी का भी मुद्दा उठाया। उनके अनुसार प्रशासन की ओर से बसों को रोके जाने के कारण लोगों को बस स्टैंड तक पहुंचने के लिए करीब दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ा।
उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर की गई व्यवस्थाओं में आम नागरिकों को परेशानी नहीं होनी चाहिए और निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान प्रशासन को सभी पक्षों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना चाहिए।
निष्पक्ष जांच और अभिलेख सार्वजनिक करने की मांग
रामपाल जाट ने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि निर्वाचित पार्षद को उसके मताधिकार से वंचित किए जाने के आरोपों की जांच होनी चाहिए। साथ ही मतदान केंद्र की वीडियोग्राफी, प्रवेश व्यवस्था, निर्वाचन अधिकारी से संबंधित आदेश और मतदान से जुड़े आधिकारिक अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की गई है।
राजस्थान में नगर पालिका एवं अन्य स्थानीय निकाय चुनावों से संबंधित विषय राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट भी नगर पालिका एवं पंचायत समिति चुनावों के लिए राज्य निर्वाचन आयोग से संपर्क का उल्लेख करती है।
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