दसलक्षण पर्व के दौरान पत्रकार वार्ता में बोले संत, कहा-धन-संपत्ति से नहीं बल्कि आत्मचिंतन और संयम से समझें जीवन की वास्तविक दिशा
अलवर। दिगम्बर जैन संत मुनि सौम्य सागर महाराज ने कहा कि जीवन विकास शिविर व्यक्ति के लिए कोरे कागज पर नई इबारत लिखने का माध्यम है। इंसान जीवन में धन कमाता है, संपत्ति जोड़ता है और वैभव का सामान जुटाता है, लेकिन इस दौड़ के बीच कई बार यह देखने का अवसर नहीं मिलता कि उसके भीतर कितना विकास हुआ है। जीवन विकास शिविर व्यक्ति को आत्मचिंतन का अवसर देता है और यह समझने की दिशा दिखाता है कि वह अब तक जीवन में कहां खड़ा है।
मुनि सौम्य सागर महाराज अलवर के स्कीम नंबर 10 स्थित जैन भवन में अपने चातुर्मास के दौरान पहली पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। दसलक्षण पर्व के अवसर पर यहां जीवन विकास शिविर का आयोजन चल रहा है। उन्होंने कहा कि जीवन को केवल धन-संपत्ति और भौतिक उपलब्धियों से नहीं जोड़ना चाहिए। व्यक्ति को सबसे पहले अपने भीतर झांकना चाहिए और अपनी कमियों को पहचानने का प्रयास करना चाहिए।
दूसरों की कमियां देखने से पहले खुद को पहचानें
मुनि सौम्य सागर महाराज ने कहा कि व्यक्ति को दूसरों की कमियां देखने के बजाय पहले स्वयं पर ध्यान देना चाहिए। अपने भीतर मौजूद कमियों को पहचानना और उन्हें दूर करने का प्रयास करना ही वास्तविक आत्मविकास की दिशा है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के लिए स्वयं को पहचानना सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि जब व्यक्ति अपने भीतर झांकता है तभी उसे अपनी वास्तविक स्थिति का बोध होता है।
उन्होंने कहा कि जीवन विकास शिविर में प्रतिभागियों को अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखने, संयम का मार्ग अपनाने और जीवन को अनुशासित बनाने की दिशा में सीखने का अवसर मिलता है। इंद्रियों को नियंत्रित करना आसान नहीं है, लेकिन निरंतर अभ्यास और आत्मचिंतन से व्यक्ति इस दिशा में आगे बढ़ सकता है।

छोटी उम्र में संयम की सीख
मुनि सौम्य सागर महाराज ने शिविर में शामिल बच्चों का उल्लेख करते हुए कहा कि कम उम्र से ही यदि बच्चों को संयम, अनुशासन और आत्मचिंतन का संस्कार मिले तो उसका प्रभाव उनके जीवन पर लंबे समय तक रहता है। उन्होंने बताया कि शिविर में सबसे छोटी बच्ची प्रेक्षा जैन भी अपनी मां के साथ निर्धारित नियमों का पालन करते हुए पूरे उत्साह से भाग ले रही है।
उन्होंने कहा कि जीवन विकास शिविर केवल किसी एक आयु वर्ग के लिए नहीं है, बल्कि इसमें बच्चे, युवा और बड़े सभी अपने जीवन को बेहतर दिशा देने के लिए सीख सकते हैं।
शिविर की गतिविधियों की दी जानकारी
इस अवसर पर शिविर संयोजक सुशील जैन सीए ने जीवन विकास शिविर के आयोजन और इसमें संचालित गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दसलक्षण पर्व के दौरान शिविर में प्रतिभागियों को धार्मिक एवं नैतिक संस्कारों के साथ जीवन को अनुशासित बनाने की दिशा में मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
पत्रकार वार्ता के दौरान श्री दिगम्बर जैन अग्रवाल पंचायती मंदिर के अध्यक्ष मुकेश जैन, मंत्री कैलाश चंद जैन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक जैन, उपाध्यक्ष अशोक जैन, कोषाध्यक्ष हुकमचंद जैन, सह मंत्री राकेश जैन, कार्यकारिणी सदस्य अजय जैन, धरणेन्द्र जैन, अमित जैन, पूर्व अध्यक्ष रमेश चंद्र जैन सहित पंडित विक्रम जैन शास्त्री मौजूद रहे।
पत्रकार वार्ता में मुनि सौम्य सागर महाराज ने जीवन विकास शिविर के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यक्ति को बाहरी उपलब्धियों के साथ अपने भीतर के विकास पर भी ध्यान देना चाहिए। आत्मचिंतन, संयम और अपनी कमियों को पहचानने की प्रक्रिया ही व्यक्ति को जीवन की सही दिशा समझने में मदद करती है।
26 सितंबर को निकलेगी भव्य शोभायात्रा
प्रेस वार्ता में अहिंसा अमृत वर्षा योग 2026 के संयोजक अभिषेक जैन ने बताया कि जीवन विकास शिविर का समापन 26 सितंबर को होगा। इस अवसर पर सुबह 6:30 बजे स्कीम नंबर 10 स्थित जैन भवन से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।
उन्होंने बताया कि शोभायात्रा में दो प्रमुख रथ शामिल होंगे। इसके साथ बैंड-बाजे, घोड़े और अन्य लवाजमे के साथ शिविरार्थी भी भाग लेंगे। शोभायात्रा का आयोजन मुनि सौम्य सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में किया जाएगा।
शोभायात्रा जैन भवन से रवाना होकर भगत सिंह चौराहे तक पहुंचेगी और वहां से वापस जैन भवन आएगी। इसके बाद जैन भवन में शिविरार्थियों का पारणा कराया जाएगा। आयोजन को लेकर जैन समाज में उत्साह का माहौल है और समापन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
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