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    Homeराजस्थानअलवरदशलक्षण पर्व के नवें दिन हुई उत्तम आकिंचन्य धर्म की पूजा

    दशलक्षण पर्व के नवें दिन हुई उत्तम आकिंचन्य धर्म की पूजा

    अनासक्ति भाव से जुड़ा है आकिंचन्य धर्म, अनंत चतुर्दशी पर होगी उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना

    अलवर। दिगम्बर जैन धर्मावलंबियों के चल रहे दशलक्षण पर्व के नवें दिन उत्तम आकिंचन्य धर्म की पूजा-अर्चना श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई। इस अवसर पर दिगम्बर जैन संत मुनि सौम्य सागर महाराज ने आकिंचन्य धर्म का महत्व समझाते हुए कहा कि ‘मेरेपन’ का त्याग ही आकिंचन्य धर्म है। जब व्यक्ति के भीतर यह भाव उत्पन्न होता है कि मेरा कुछ भी नहीं है, तब वह उत्तम आकिंचन्य धर्म की ओर आगे बढ़ता है।

    मुनि सौम्य सागर महाराज ने कहा कि आकिंचन्य का अर्थ है—मेरा कुछ भी नहीं। व्यक्ति जिस धन-दौलत, घर-द्वार और भौतिक वस्तुओं को अपना समझता है, वे स्थायी रूप से उसकी नहीं हैं। यहां तक कि शरीर भी उसका स्थायी स्वामित्व नहीं है। इन सभी के प्रति अनासक्ति का भाव उत्पन्न होना ही उत्तम आकिंचन्य धर्म का सार है।

    उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन अनेक प्रकार के मोह और ममत्व से घिरा रहता है। ‘यह मेरा है’ का भाव व्यक्ति को संसार के बंधनों से जोड़ता है। इसके विपरीत जब व्यक्ति वस्तुओं और संबंधों के प्रति आसक्ति को कम करता है तथा आत्मस्वरूप की ओर ध्यान केंद्रित करता है, तब उसके भीतर आध्यात्मिक शांति और वैराग्य का भाव विकसित होता है।

    अनंत चतुर्दशी पर होगी उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा

    जैन पत्रकार महासंघ अलवर के जिला संयोजक हरीश जैन ने बताया कि दशलक्षण पर्व के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी के अवसर पर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा-अर्चना की जाएगी। इस अवसर पर शहर के विभिन्न दिगम्बर जैन मंदिरों में पूरे दिन धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।

    उन्होंने बताया कि अनंत चतुर्दशी के अवसर पर विभिन्न दिगम्बर जैन मंदिरों में कलशाभिषेक के कार्यक्रम भी होंगे। वहीं स्कीम नंबर 10 स्थित जैन मंदिर में मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा का महामस्तकाभिषेक किया जाएगा।

    अनंत चतुर्दशी दशलक्षण पर्व का महत्वपूर्ण धार्मिक दिवस माना जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबी उपवास और धार्मिक साधना करते हैं। जैन समाज में इस दिन विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिलता है। अनेक जैन व्यवसायी धार्मिक आस्था के चलते अपने प्रतिष्ठान भी बंद रखते हैं और पूजा-अर्चना तथा धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं।

    दशलक्षण पर्व के दौरान प्रतिदिन अलग-अलग उत्तम धर्मों की आराधना की जाती है। पर्व के अंतिम चरण में श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह बना हुआ है। मंदिरों में पूजा-अर्चना, अभिषेक और धार्मिक कार्यक्रमों के साथ वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।

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