जयपुर। गणपति बप्पा मोरया के जयकारों और पूरी तरह भक्तिमय माहौल के बीच जयपुर से एक अनूठी और भव्य विसर्जन यात्रा देखने को मिली। इस धार्मिक आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि भगवान गणेश की प्रतिमा को सड़क मार्ग के बजाय विशेष रूप से हवाई जहाज के जरिए जयपुर से सीधे मुंबई पहुंचाया गया। मुंबई पहुंचने के बाद प्रतिमा को जुहू चौपाटी ले जाया गया, जहां पूरी श्रद्धा, विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गणपति महाराज का समुद्र में विसर्जन किया गया।
जयपुर में हुए धार्मिक अनुष्ठान और प्रस्थान
जयपुर में इस विशेष आयोजन की शुरुआत सुबह 10 बजे भगवान गणेश की भव्य पूजा-अर्चना के साथ हुई। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा कर देश और समाज की सुख-समृद्धि तथा मंगल की कामना की। इसके बाद सुबह 11 बजे हवन का आयोजन किया गया और दोपहर 12 बजे भक्तों में प्रसाद वितरित किया गया। सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद, दोपहर 3:15 बजे गणपति महाराज की प्रतिमा का विधिवत प्रस्थान हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया और 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारों के बीच प्रतिमा को हवाई मार्ग से मुंबई ले जाने के लिए रवाना किया गया।
मुंबई की जुहू चौपाटी पर हुआ भव्य विसर्जन
जयपुर से विमान का सफर तय कर गणपति महाराज मुंबई पहुंचे। मुंबई एयरपोर्ट से प्रतिमा को सीधे जुहू चौपाटी लाया गया। यहां स्थानीय परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद अपार जनसमूह और गहरी आस्था के साथ गणपति महाराज की प्रतिमा को समुद्र में विसर्जित किया गया।
विसर्जन के इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने नम आंखों और जयकारों के साथ 'अगले बरस तू जल्दी आ' की प्रार्थना करते हुए बप्पा को विदाई दी। इस अनूठी यात्रा के माध्यम से राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच एक मजबूत धार्मिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव की झलक देखने को मिली।
इस पूरे आयोजन में प्रवासी संघ राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष एवं स्टील उपभोक्ता मंच राजस्थान के चेयरमैन भीम सिंह कासनियां मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके अलावा सामाजिक, धार्मिक और व्यावसायिक जगत से जुड़े कई गणमान्य नागरिक भी इस ऐतिहासिक यात्रा के साक्षी बने।
25 वर्षों की साधना और आराधना
आयोजक विश्वनाथ ने इस यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वे पिछले 25 वर्षों से लगातार भगवान गणपति की साधना और आराधना करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह उन्हीं की कृपा और माता-पिता के आशीर्वाद का परिणाम है कि जयपुर से मुंबई की जुहू चौपाटी तक की यह भव्य यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई और विधि-विधान से विसर्जन किया गया। हवाई मार्ग से हुई यह गणपति विसर्जन यात्रा आस्था और परंपरा का एक अनूठा उदाहरण बन गई है।


