बाला किला स्थित मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था, शाम 5:30 बजे बाद पैदल प्रवेश बंद; प्लास्टिक पर रहेगा प्रतिबंध
अलवर। बाला किला स्थित करणी माता मंदिर में आगामी 11 से 19 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले मेले की तैयारियों को लेकर मंगलवार को जिला कलक्ट्रेट सभागार में बैठक आयोजित की गई। अतिरिक्त जिला कलक्टर शहर अम्बालाल मीणा की अध्यक्षता में हुई बैठक में मेले की व्यवस्थाओं, श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता, पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं सहित विभिन्न व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ सौंपे गए दायित्व समय पर पूरे करने के निर्देश दिए गए।
सुबह 6 से शाम 6 बजे तक होंगे दर्शन
अतिरिक्त जिला कलक्टर ने बताया कि मेले के दौरान श्रद्धालुओं के प्रवेश का समय सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा। शाम 5:30 बजे के बाद पैदल यात्रियों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इस दौरान केवल दुपहिया वाहनों को प्रवेश की अनुमति होगी।
मेले में ध्वनि विस्तारक यंत्रों, डीजे और प्लास्टिक से बने एक बार इस्तेमाल होने वाले उत्पादों पर प्रतिबंध रहेगा। बाला किला क्षेत्र और मेला स्थल पर पॉलिथिन की थैलियां ले जाने तथा उनके उपयोग की भी अनुमति नहीं होगी।
सफाई, पेयजल और भंडारे के लिए विशेष निर्देश
नगर निगम को मेले के दौरान नियमित साफ-सफाई कराने, कचरे का समय पर उठाव करने और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निर्धारित स्थानों पर अस्थायी शौचालय भी स्थापित किए जाएंगे।
भंडारे की अनुमति देते समय आयोजकों को पर्याप्त संख्या में कचरा पात्र रखने और कचरे का उचित निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए पाबंद किया जाएगा। वन क्षेत्र में कचरा फेंकने पर रोक रहेगी। भंडारों में प्रसाद वितरण के लिए प्लास्टिक के डिस्पोजेबल उत्पादों के स्थान पर पेड़ों के पत्तों से बनी पत्तल-दोने और मिट्टी के कुल्हड़ों का उपयोग करने के निर्देश दिए गए।
प्रसाद की दुकानों के स्थान इस प्रकार निर्धारित किए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी नहीं हो।
रास्ते में सुरक्षा और यातायात पर रहेगा विशेष ध्यान
सार्वजनिक निर्माण विभाग को वन नाके से मंदिर तक के रास्ते में क्षतिग्रस्त दीवारों और सड़क के पास मजबूत बैरिकेडिंग कराने के निर्देश दिए गए। आवश्यक स्थानों पर गति अवरोधक और संकेतक लगाने तथा सड़क पर पड़ी निर्माण सामग्री हटाने को भी कहा गया।
मेले के दौरान चार पहिया वाहनों को वन विभाग के नाके से आगे जाने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, मेला व्यवस्था में लगे वाहनों को आने-जाने की छूट रहेगी। रामायणी हनुमान मंदिर से प्रतापबंध चौकी तक सुगम आवागमन बनाए रखने के लिए सड़क के एक तरफ ही दुकानें और स्टॉल लगवाए जाएंगे।
वृद्ध, असहाय और दिव्यांग श्रद्धालुओं को लाने-ले जाने के लिए अलवर वाहिनी की व्यवस्था करने के निर्देश जिला परिवहन अधिकारी को दिए गए।
चिकित्सा दल, रोशनी और विश्राम की व्यवस्था
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को मेले में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यकतानुसार चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ के दल गठित करने के निर्देश दिए गए।
नगर विकास न्यास को मेला स्थल पर पर्याप्त रोशनी और सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। मंदिर तक जाने वाले रास्ते में श्रद्धालुओं के अल्पकालीन विश्राम के लिए छाया और पेयजल की व्यवस्था भी की जाएगी।
पुलिस बल और अग्निशमन वाहन रहेंगे तैनात
मेले में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए गए।
मेला स्थल पर नियंत्रण कक्ष स्थापित कर वायरलेस सेट उपलब्ध कराया जाएगा। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अग्निशमन वाहन की व्यवस्था भी रहेगी।
बैठक में ये अधिकारी और पदाधिकारी रहे मौजूद
बैठक में उप वन संरक्षक सरिस्का अंकुश जिंदल, उपखंड अधिकारी अलवर माधव भारद्वाज, पुलिस उपाधीक्षक ग्रामीण सुनील जाखड़, जिला परिवहन अधिकारी सविता भारद्वाज, जयपुर डिस्कॉम के अधिशासी अभियंता महेश देशवाल, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. महेश बैरवा और रेंज ऑफिसर बफर जोन सरिस्का शंकर सिंह उपस्थित रहे।
इसके अलावा करणी माता मंदिर के महंत उमेश शर्मा, मेला कमेटी के सदस्य लक्ष्मी नारायण कश्यप, सुरेश गुप्ता, बाबूलाल, चंद्रप्रकाश सैनी और लोकेश खंडेलवाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, मंदिर ट्रस्ट और मेला प्रबंधन समिति के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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